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सरकारों के समझौते के तहत भारत से निर्माण श्रमिकों का पहला जत्था इज़राइल पहुंचा

Israel: भारत के 60 से ज्यादा कामगारों का पहला जत्था इजराइल पहुंच गया है। ये कामगार इजराइल में ट्रेंड वर्कर्स की कमी का सामना कर रही कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री में काम करेंगे। ये कामगार दोनों देशों की सरकारों (जी2जी) के बीच हुए समझौते के तहत यहां पहुंचे हैं। बिचौलियों को दूर रखने और इजराइली परीक्षकों (एग्जामिनर) की ओर से आयोजित ‘स्क्रीनिंग टेस्ट’ के जरिए इस प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है। इजराइली परीक्षकों ने भारत का दौरा किया था और उन्होंने भारतीय एजेंसियों के साथ इस प्रक्रिया में काम भी किया था। निर्माण मजदूरों का पहला जत्था मंगलवार शाम को पहुंचा। 

भारत में इजराइल के राजदूत नाओर गिलोन ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘(दोनों देशों के बीच) समझौते के तहत इजराइल जाने वाले 60 से ज्यादा भारतीय निर्माण श्रमिकों के पहले जत्थे को रवाना करने के लिए विदाई समारोह आयोजित किया गया। ये भारत के राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) सहित कई लोगों की कड़ी मेहनत का नतीजा है।’’ 

उन्होंने कहा कि यकीन है कि ये कामगार भारत और इजराइल के बीच पी-टू-पी (लोगों के बीच) संबंधों को आगे बढ़ाएंगे। इससे पहले कारोबारियों के बीच (बी-टू-बी) समझौते के तहत पिछले कुछ महीनों में 900 से ज्यादा कामगार भारत से यहां आ चुके हैं। कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री के सूत्रों ने धीमी रफ्तार पर निराशा जताते हुए कहा कि तीन महीने के दौरान भारत और श्रीलंका के 20,000 से अधिक कामगारों को नौकरियों के लिए मंजूरी दी गई थी, लेकिन अब तक करीब एक हजार मजदूर ही यहां आए हैं। 

उन्होंने देरी के लिए सरकारी प्रॉसेस को जिम्मेदार ठहराया, जिसमें सरकारों से कई स्तर की इजाजत ली जाती है।  बताया जाता है कि ज्यादातर चुने गए कामगारों ने अपनी मौजूदा नौकरियों से इस्तीफा दे दिया है और वे इजराइल में काम करने के लिए वीजा मिलने का इंतजार कर रहे हैं। इजराइली सरकार ने बार-बार इन प्रॉसेस को तेज करने के कहा लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका है। 

इजराइली कॉन्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन ने कहा कि सरकार ने हमें जो काम सौंपा, उसे रिकॉर्ड तेजी से पूरा किया गया। हमने कई हफ्ते पहले कामगारों के चयन के तीन दौरे पूरे कर लिए थे, जिसमें 20,000 से अधिक कामगारों को मंजूरी दी गई थी।