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भारत में क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय दुग्ध दिवस? जानिए महत्व

भारत में श्वेत क्रांति के जनक कहलाने वाले डॉ. वर्गीज कुरियन की जयंती हर साल 26 नवंबर को राष्ट्रीय दुग्ध दिवस के रूप में मनाई जाती है। इस दिन इंसानों की सेहत के लिए दूध के महत्व पर प्रकाश डाला जाता है। साथ ही भारत में दूध और इसके उत्पादों की खपत बढ़ाने पर जोर दिया जाता है। डॉ. कुरियन के दूरदर्शी नेतृत्व ने भारत को दुनिया के सबसे बड़े दूध उत्पादक देश में बदल दिया। डेयरी उद्योग में क्रांति आई और देश भर के लाखों डेयरी किसानों की आजीविका बेहतर हुई।

डॉ. वर्गीज कुरियन के सहकारी मॉडल ने ग्रामीण भारत को बदल दिया। इससे अपना उत्पादन और मुनाफा खुद किसानों के हाथ में आ गया। उनके दूरदर्शी नेतृत्व ने डेयरी फार्मिंग को एक लोकतांत्रिक और टिकाऊ उद्यम बना दिया। जमीनी स्तर पर प्रौद्योगिकी को पेशेवर प्रबंधन के साथ जोड़ कर डॉ. कुरियन ने लाखों किसानों को सशक्त बनाया। उनकी आजीविका में उल्लेखनीय सुधार किया और ग्रामीण समुदायों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया।

दूध की अहमियत बताने वाला राष्ट्रीय दुग्ध दिवस श्वेत क्रांति के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने पर भी जोर देता है। इस साल सितंबर में सरकार ने डॉ. वर्गीज कुरियन के नजरिये को आगे बढ़ाने के लिए श्वेत क्रांति 2.0 लॉन्च की। उनकी विरासत देश भर में पोषण, स्थिरता और ग्रामीण विकास को आगे बढ़ाने की कोशिशों पर जोर देती है।