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क्या है मेहंदीपुर बालाजी का सच

हमारे भारत में आज भी कई ऐसे मंदिर है जो रहस्यों से भरे हुए हैं। हर मंदिर की अपनी एक गाथा और महत्व है। इन्हीं मंदिरों में से एक है मेहंदीपुर बालाजी। ये मंदिर राजस्थान के दौसा जिले में बसा हुआ है। मेहंदीपुर बालाजी में लोग दूर दूर से भूत-प्रेत बाधाओं से मुक्ति होने आते है। हनुमान चालीसा में एक दोहा है भूत प‌िशाच न‌िकट नहीं आवे महावीर जब नाम सुनावे, इस दोहे को सच करता है राजस्थान का ये रहस्यमय मंदिर। 

मेहंदीपुर बालाजी मंदिर में तीन देवता व‌िराजते हैं पहले बालाजी महाराज, दूसरे प्रेतराज और तीसरे भैरों बाबा। कहते है मंदिर में हनुमान जी वास करते है। मंदिर में हनुमान जी की बहुत बड़ी मूर्ति भी है। कहा जाता है कि इंडिया का EXORCISM सबसे ज्यादा मेहंदीपुर बालाजी मंदिर में किया जाता है। मंदिर को दो अलग भाग में भी बाटा हुआ है। एक भाग में नोरमल लोग भगवान के दर्शन करते है वही दूसरे भाग में देखा जाता है की औरते जंजीरों से बंधी हुई है, बाल खोल कर हिल रही है अजीब अजीब हरकते कर रही है। दीवारों में सिर पीट रही है। 

मंद‌‌िर में बालाजी को लड्डू, प्रेतराज को चावल और भैरों बाबा को उड़द का प्रसाद चढ़ता है। कहते हैं क‌ि बालाजी के प्रसाद के लड्डू खाते ही जिन व्यक्त‌ि के अंदर भूत प्रेत मौजूद होता है वो छटपटाने लगता है और अजब-गजब हरकतें करने लगता है। 

ये भी कहा जाता है कि मंदिर में जाने वाले लोगों को कम से कम एक हफ्ते पहले लहसुन, प्याज, अण्डा, मांस, शराब का सेवन बंद करना पड़ता है नहीं तो भूत प्रेत बड़ी आसानी से लग जाता है। किसी भी तीर्थ स्थल जाते है तो वहां का प्रसाद घर लेकर जाते है लेकिन मेहंदीपुर बालाजी का प्रसाद मंदिर में ही खत्म करके जाना होता है। दर्शन के बाद जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी मंदिर से निकलना होता है। क्योंकि जाते समय पीछे से कोई न कोई आपको जरूर पुकारता है और वो आवाज आपके सबसे करीबी की होती है भूल कर भी अगर आप पीछे मूड गए तो प्रेत आत्मा आपको अपने वश में कर लेती है।