उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने देश में जनसांख्यिकीय अव्यवस्था के बढ़ते खतरे पर गहरी चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि इसके नतीजे परमाणु बम से कम खतरनाक नहीं है. जगदीप धनखड़ जयपुर के बिड़ला ऑडिटोरियम में चार्टर्ड एकाउंटेंट्स के एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे. इस दौरान उन्होंने कहा कि हाल के समय में जनसांख्यिकीय अव्यवस्था ने कुछ क्षेत्रों को राजनीतिक किलों में बदल दिया है, जहां चुनावों का कोई वास्तविक अर्थ नहीं, यह तो बेहद चिंताजनक है, लोकतंत्र ने अपना सार खो दिया है.
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत को एक स्थिर वैश्विक शक्ति बने रहना चाहिए. इस ताकत को अभी और उभरना होगा. यह सदी भारत की होनी चाहिए. यह मानवता के लिए अच्छा होगा, जो दुनिया में शांति और सद्भाव में योगदान देगा. इसी के साथ उन्होंने ये भी कहा कि अगर हम इस देश में होने वाली जनसांख्यिकीय उथल-पुथल के खतरों से आंखें मूंद लेते हैं तो यह देश के लिए हानिकारक होगा.