Maharashtra Assembly Elections: 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में महायुति गठबंधन की भारी जीत के साथ, एकनाथ शिंदे ने "कठपुतली मुख्यमंत्री" और "गद्दार" जैसे टैग को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। शिंदे महायुति सरकार का चेहरा बनकर उभरे हैं। उन्हें अपने मिलनसार स्वभाव, आम आदमी से जुड़ाव और कल्याणकारी योजनाओं के लिए जाना जाता है।
एकनाथ शिंदे ने 2022 में शिवसेना में विद्रोह की अगुवाई की। नतीजतन पार्टी में विभाजन हुआ और उद्धव ठाकरे सरकार गिर गई। 'मुख्यमंत्री लड़की बहिन' योजना की बदौलत उन पर लगा "गद्दार" का टैग "लड़का भाऊ" यानी प्रिय भाई में बदल गया।
इस खास योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये दिए जाते हैं। इस योजना की दो करोड़ से ज्यादा लाभार्थी हैं। शिंदे ने इस पहल को चुनावों में "बड़ा गेम चेंजर" बताया। एकनाथ शिंदे ने ये भी कहा कि महाराष्ट्र की जनता के जनादेश ने दिखा दिया है कि दिवंगत बाल ठाकरे के आदर्शों को कौन आगे बढ़ा रहा है।
मुख्यमंत्री के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान एकनाथ शिंदे ने सावधानी बरतते हुए अपनी छवि एक 'आम आदमी' की बनाई। उन्हें कभी मानसून से पहले निरीक्षण के लिए नाले में उतरते देखा गया तो कभी वे सड़क दुर्घटना पीड़ितों की मदद के लिए अपना काफिला रोकते दिखे।
मूल रूप से सतारा के दरे गांव के रहने वाले शिंदे को अक्सर ट्रैक्टर चलाते और खेतों में मेहनत करते देखा जाता था। वे खुद को "किसान का बेटा" बताना नहीं भूलते। महायुति गठबंधन को जीत दिलाने के बाद, ये देखना बाकी है कि क्या एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के तौर पर अपना पद बरकरार रख पाएंगे?