महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव आरक्षण के घने कोहरे के बीच हो रहा है. एक तरफ मराठा बनाम ओबीसी तो दूसरी ओर आदिवासी बनाम धनगर विवाद उठ खड़े हुए हैं. ऐसे में सियासी दलों को राजनीतिक संतुलन के साथ-साथ जातीय बैलेंस बनाए रखने की चुनौती है, क्योंकि किसी एक समुदाय को साधने में दूसरे समुदाय के नाराज होने का खतरा बना हुआ है. ऐसे में बीजेपी की अगुवाई वाले महायुति (एनडीए) गठबंधन के खिलाफ कांग्रेस नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन ने कॉस्ट पॉलिटिक्स का ‘डीएमके’ फॉर्मूला बनाया है, जिसके सहारे लोकसभा चुनाव की बाजी अपने नाम करने में सफल रही है और विधानसभा में वही दांव आजमा रही है.