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ईरान युद्ध से रुपया कमजोर! RBI के भंडार देंगे सहारा!

भारत की मुद्रा यानी रुपया इस साल एशिया की सबसे ज्यादा उतार-चढ़ाव वाली करेंसी में शामिल हो गया है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और मजबूत अमेरिकी डॉलर ने रुपये पर जबरदस्त दबाव बना दिया है। अप्रैल महीने में रुपया 93 से 95 प्रति डॉलर के दायरे में कारोबार करता रहा, लेकिन अब यह 96 प्रति डॉलर के करीब पहुंच चुका है। ऐसे में निवेशकों को यह चिंता है कि क्या भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 100 के ऐतिहासिक स्तर तक फिसल सकता है। 

बीते एक साल में भारतीय मुद्रा 10 फीसदी से ज्यादा कमजोर हुई है, जबकि इस साल अब तक करीब 5 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ीं तथा विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रही तो आने वाले महीनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है और तेल का व्यापार मुख्य रूप से डॉलर में होता है, इसलिए कच्चे तेल की महंगाई सीधे रुपये को कमजोर करती है। यही कारण है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) भी अब हर छोटी हलचल पर करीबी से नजर बनाए हुए है।

करेंसी बाजार के जानकारों का कहना है कि फिलहाल रुपया 100 प्रति डॉलर तक पहुंचे, इसकी संभावना बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन इसे नजर अंदाज भी नहीं किया जा सकता। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस के मुताबिक आने वाले समय में युद्ध की स्थिति और कच्चे तेल की कीमतें रुपये की दिशा तय करेंगी। उनका कहना है कि अगर कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे रहता है तो रुपया फिर से 94-95 प्रति डॉलर के दायरे में मजबूत हो सकता है। लेकिन यदि तेल की कीमतें 110 से 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचती हैं तो रुपया 96 के स्तर को भी पार कर सकता है।

कोटक सिक्योरिटीज के हेड ऑफ कमोडिटी एंड करेंसी रिसर्च अनिंद्य बनर्जी के अनुसार रुपये के 100 प्रति डॉलर तक पहुंचने के लिए तीन बड़ी घटनाएं एक साथ होना जरूरी है। पहला, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव और ज्यादा बढ़े तथा तेल सप्लाई में रुकावट आए। दूसरा, ब्रेंट क्रूड की कीमतें 2008 के रिकॉर्ड स्तर यानी करीब 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाएं। तीसरा, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI की बिकवाली मार्च और अप्रैल जैसी तेज रफ्तार से जारी रहे। उनका कहना है कि अगर ये तीनों हालात एक साथ बने तो रुपये पर बहुत ज्यादा दबाव आ सकता है।

LKP सिक्योरिटीज के वीपी रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी का मानना है कि यदि मौजूदा वैश्विक हालात लंबे समय तक बने रहे तो 2026 के अंत तक रुपया 100 प्रति डॉलर तक पहुंचने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। साल 2025 में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों से रिकॉर्ड 1.54 लाख करोड़ रुपये निकाले। पूरे साल में 12 महीनों में से 7 महीने विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली करते रहे। वहीं इस साल अब तक FPI भारतीय शेयर बाजारों से 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा निकाल चुके हैं। इस लगातार बिकवाली ने रुपये की कमजोरी को और बढ़ा दिया है।