महाराष्ट्र के नागपुर जिले में पेंच टाइगर रिजर्व के पास तुयापार गांव में इन दिनों दहशत का माहौल है। गांव के लोगों को बाघ के हमले का डर सता रहा है। यहां के लोगों के लिए खेत प्राकृतिक सुंदरता की बजाए छिपा हुआ खतरा है। लोगों को डर है कि खेत में कदम रखते ही उनकी जान जा सकती है।
इलाके के फॉरेस्ट गार्ड ने बताया कि उन्होंने कई बार गांवों में बाघ को घुसते देखा। इसकी वजह से गांव वालों में डर बढ़ गया है। तुयापार गांव में बाघ के हमले में हाल ही में एक 58 साल के किसान सुक्रम सरयम की जान चली गई। वो अपने खेत में जा रहे थे, तभी बाघ ने उन पर हमला कर दिया।
सुक्रम सरयम की पत्नी 16 अक्टूबर, 2024 को हुई उस भयावह घटना को याद करके सिहर जाती हैं। वो बताती हैं कि इस घटना के बाद वो और पूरा गांव सदमे में हैं। सुक्रम सरयम अपने परिवार में अकेले कमाने वाले थे। लेकिन उनकी मौत के बाद से परिवार की आर्थिक हालत बेहद खराब है। उनकी पत्नी के लिए बच्चों को पालना मुश्किल हो रहा है। अपने बच्चों के भविष्य के लिए उन्होंने प्रशासन से मदद की अपील की है।
गांव में बाघ के बढ़ते हमलों की वजह से लोग अब खेतों में जाने से बच रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से बाघों को दूसरी जगह भेजने या गांव वालों केे लिए कहीं और रहने का इंतजाम करने की मांग की है। वो अपनी रोटीरोजी के लिए सरकार से मुआवजे और नौकरी की मांग कर रहे हैं।
इलाके के लोगों के मुताबिक पिछले आठ महीनों में आसपास के आदिवासी इलाकों में बाघ के हमले से छह लोगों की मौत हो चुकी है। गांव के लोग बताते हैं कि उन्हें कई बार प्रशासन से मदद की गुहार लगाई। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
उधर, गांव में बाघों के बढ़ते आतंक को देखते हुए कई तरह के तर्क दिए जा रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है प्रशासन ने अगर बाघों की बढ़ती आबादी पर ध्यान नहीं दिया, तो पेंच टाइगर रिजर्व के आसपास मानव-बाघ संघर्ष की घटनाएं बढ़ सकती हैं।