तेलंगाना के नागरकुरनूल में बचाव दल एसएलबीसी की आंशिक रूप से ढही सुरंग में फंसे आठ मजदूरों को निकालने में जुटे हैं और फंसे हुए लोगों तक पहुंचने के लिए सुरंग खोदने में इस्तेमाल होने वाली मशीन (टीबीएम) से रास्ता बना रहे हैं। श्रीशैलम लेफ्ट बैंक कैनाल (एसएलबीसी) सुरंग की छत ढहने के बाद इंजीनियरों और मजदूरों के फंसने की इस घटना के एक हफ्ते बाद भी बचाव कार्य जोरों पर है।
नागरकुरनूल के पुलिस अधीक्षक (एसपी) वैभव गायकवाड़ ने बताया कि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), सेना, सरकारी खनन कंपनी ‘सिंगरेनी कोलियरीज’, ‘रैट होल’ खनिकों और दूसरी एजेंसियों के कर्मियों की टीम लगातार काम कर रही हैं।
एसपी ने बताया, "बचाव अभियान जारी है। शनिवार सुबह एक टीम सुरंग के अंदर गई। पानी निकालने और मलबा हटाने का काम भी साथ-साथ चल रहा है।" उन्होंने कहा कि आगे का रास्ता साफ करने के लिए टीबीएम के हिस्सों को भी काटा जा रहा है।
अधिकारी ने कहा, "फंसे हुए लोगों की तलाश करने के लिए उस स्थान तक पहुंचने में जो भी दिक्कतें आ रही हैं, हमें उन्हें हटाना होगा।" उन्होंने कहा कि बचाव कर्मियों को इन "खामियों" की पहचान करने के लिए आगे की जांच करने की जरूरत है।
एसएलबीसी सुरंग परियोजना पर काम कर रहे आठ लोग 22 फरवरी को सुरंग का एक हिस्सा ढह जाने के बाद फंस गए थे। पिछले कुछ दिन से सेना, नौसेना, सिंगरेनी कोलियरीज और दूसरी एजेंसियों के 500 से ज्यादा कुशल कर्मियों की टीम बचाव अभियान में शामिल है।
फंसे हुए लोगों की पहचान मनोज कुमार (उत्तर प्रदेश), श्रीनिवास (उत्तर प्रदेश), सनी सिंह (जम्मू-कश्मीर), गुरप्रीत सिंह (पंजाब) और संदीप साहू, जेगता जेस, संतोष साहू और अनुज साहू के रूप में हुई है, जो सभी झारखंड के हैं।
इन आठ में से दो इंजीनियर, दो ऑपरेटर और बाकी चार झारखंड के मजदूर हैं। दो इंजीनियर और चार मजदूर एसएलबीसी सुरंग परियोजना की ठेकेदार कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स के लिए काम कर रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि राज्य के सिंचाई मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी, आबकारी मंत्री जुपल्ली कृष्ण राव, मुख्य सचिव शांति कुमारी यहां से दुर्घटनास्थल के लिए रवाना हो गए हैं।