प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना के अनुरूप हर बच्चे तक शिक्षा का अधिकार पहुंचाने और शिक्षा के लाभ को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू किए गए शाला प्रवेशोत्सव और कन्या केलवणी रथ यात्रा अभियान का 24वां संस्करण बुधवार को गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने वडनगर के बी.एन. हाई स्कूल से लॉन्च किया।
पिछले 23 वर्षों से लगातार चल रहे इस अभियान के कारण राज्य में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है और प्राथमिक विद्यालयों में ड्रॉपआउट दर में उल्लेखनीय कमी आई है। गुजरात सरकार ने प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा स्तर पर स्कूल छोड़ने वाले छात्रों की संख्या को लगभग शून्य करने का लक्ष्य रखा है।
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए राज्य का शिक्षा विभाग अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग कर रहा है। गांधीनगर स्थित विद्या समीक्षा केंद्र में एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम (EWS) लागू किया गया है, जो उन बच्चों की पहचान करता है जिनके स्कूल छोड़ने की आशंका होती है। पिछले वर्ष इस सिस्टम की मदद से 1,67,446 ऐसे बच्चों की पहचान की गई, जो स्कूल छोड़ने के जोखिम में थे, और उन्हें शिक्षा से जुड़े रहने में मदद मिली। वहीं चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम (CTS) के जरिए लगभग 90,212 ड्रॉपआउट बच्चों को दोबारा स्कूलों में दाखिला दिलाया गया।
AI आधारित यह प्रणाली कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों के रिकॉर्ड, उपस्थिति, शैक्षणिक प्रदर्शन, मूल्यांकन, आयु, लिंग और दिव्यांगता जैसी जानकारियों का विश्लेषण कर यह अनुमान लगाती है कि कौन-सा छात्र स्कूल छोड़ सकता है। इसके बाद संबंधित अधिकारियों को अलर्ट भेजा जाता है ताकि समय रहते हस्तक्षेप किया जा सके।
सिस्टम लंबे समय तक अनुपस्थिति, कमजोर शैक्षणिक प्रदर्शन, स्वास्थ्य समस्याएं, व्यवहार संबंधी चुनौतियां, आर्थिक स्थिति, परिवार का प्रवास, शिक्षा के प्रति पारिवारिक दृष्टिकोण और स्कूल की आधारभूत सुविधाओं जैसे कारकों का भी विश्लेषण करता है। इस वर्ष भी AI आधारित प्रणाली ने 1,18,234 ऐसे बच्चों की पहचान की है, जिनके स्कूल छोड़ने की आशंका है। सरकार इन बच्चों के लिए विशेष सहायता और हस्तक्षेप कार्यक्रम चलाएगी।
चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम (CTS) राज्य के 54,000 से अधिक स्कूलों और 1 करोड़ से ज्यादा छात्रों का डेटा संजोए हुए है। यह प्लेटफॉर्म बालवाटिका से लेकर प्राथमिक शिक्षा तक छात्रों की निगरानी करता है और ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान कर उन्हें दोबारा शिक्षा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गुजरात सरकार अब CTS को AI आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम के साथ जोड़ रही है, जिससे छात्रों की उपस्थिति, प्रगति और अन्य संकेतकों के आधार पर संभावित ड्रॉपआउट की पहले से पहचान कर समय रहते कदम उठाए जा सकें।