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गैर-अल्पसंख्यक अधिकारी और नेशनल स्टेटस की दलील

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) की माइनॉरिटी स्टेट्स से संबंधित मामले की सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार और बुधवार को सुनवाई हुई. सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाली सात जजों की बेंच ने मामले की सुनवाई की. पीठ ने 1968 के फैसले की वैधता की जांच करने के लिए याचिकाओं पर सुनवाई की, जिसने एएमयू का अल्पसंख्यक दर्जा छीन लिया था.

पीठ में जस्टिस संजीव खन्ना, सूर्यकांत, जेबी पारदीवाला, दीपांकर दत्ता, मनोज मिश्रा और सतीश शर्मा भी शामिल थे. 1968 में एएमयू की माइनॉरिटी स्टेट्स को यह कहते हुए खत्म कर दिया गया था कि यह न तो मुस्लिम द्वारा स्थापित किया गया था और न ही अल्पसंख्यक द्वारा प्रशासित किया गया था.

सुनवाई के दौरान क्या हुआ?

सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि एक गैर अल्पसंख्यक संस्थान यह नहीं कह सकता कि मैं केवल कुछ छात्रों को प्रवेश दूंगा. यह प्रवेश मानदंड केवल अल्पसंख्यक संस्थानों को दिया गया है. उन्होंने कहा कि किसी कानून द्वारा विनियमित होने से उसे अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त होने से कोई नुकसान नहीं होता. यदि प्रशासन का अधिकार कानून द्वारा विनियमित होता है तो अल्पसंख्यक दर्जे पर कोई रोक नहीं है.