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जलवायु परिवर्तन से दुनिया भर में केले की खेती पर पड़ रहा बुरा असर, केरल में भी हालात खराब

Kerala: दुनिया भर में लोकप्रिय फल केला के उत्पादन पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। एक अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संगठन द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया है कि जलवायु परिवर्तन इसके उत्पादन पर बुरा असर डाल रहा है। इससे दुनिया भर में केले का उत्पादन करने वाले किसानों की मुश्किलें बढ़ रही हैं।

अंतरराष्ट्रीय संस्था क्रिश्चन ऐड की एक शोध से पता चला है कि दक्षिण अफ्रीका और कैरेबियाई द्वीप समूह में जलवायु परिवर्तन के कारण 60 फीसदी यानि दो तिहाई केला उत्पादन क्षेत्र बर्बाद हो सकता है। केला उगाने वाले क्षेत्र में जलवायु संकट की वजह से दुनिया में केले की उपलब्धता कम हो जाएगी।

केला उत्पादन में भारत दुनिया में पहले नंबर पर है। वहीं फलों की फसलों में, केला क्षेत्रफल के मामले में तीसरा स्थान रखता है। केला फल उत्पादन का 33 फीसदी और कुल फल क्षेत्रफल का लगभग 13 फीसदी है। केरल में केला एक प्रमुख कृषि उपज है। हालांकि यहां के किसानों का कहना है कि उन्हें केले की खेती में ज्यादा खर्च करना पड़ता है और उन्हें मुनाफा कम होता है।

केरल में ज्यादातर केला उत्पादक व्यावसायिक रूप से 'नेंद्रन केला' या प्लांटैन किस्म उगाते हैं। हालांकि, आज, बहुत से लोग टैपिओका की खेती की ओर बढ़ रहे हैं जो कम से कम न्यूनतम फायदा सुनिश्चित करता है। जलवायु परिवर्तन ने नेंड्रन केले की गुणवत्ता को प्रभावित किया है, जिससे इसके निर्यात पर असर पड़ रहा है।

जलवायु परिवर्तन ने नई बीमारियों को जन्म दिया है जो कुछ ही हफ़्तों में पूरे बागानों को बर्बाद कर देती हैं। किसान केले के उत्पादन में गिरावट के लिए सरकार से मिलने वाली मदद में कमी और इन पौधों के संक्रमणों पर शोध की कमी को जिम्मेदार मानते हैं।