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ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में आज देशभर में मेडिकल स्टोर बंद, 12.5 लाख केमिस्ट हड़ताल पर

ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) ने आज देशभर में ऑनलाइन दवाओं की बिक्री और नियमों के कथित उल्लंघन के विरोध में हड़ताल का ऐलान किया है. इस हड़ताल की वजह से देशभर में सभी मेडिकल स्टोर 24 घंटे के लिए बंद रहेंगे. हालांकि आपातकालीन दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है. एसोसिएशन ने देशभर के 12.5 लाख दवा विक्रेताओं के बंद में शामिल होने का दावा किया है. महाराष्ट्र में भी बंद को पूर्ण समर्थन मिलने की बात कही गई है.

दरअसल AIOCD ने ऑनलाइन दवा बिक्री की वैधता और इसके नियामक नियमों पर सवाल उठाए हैं. एसोसिएशन ने ऑनलाइन दवा बिक्री से कारोबार प्रभावित होने की बात कही है. एसोसिएशन ने सरकार से तत्काल प्रभाव से दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर रोक लगाने की मांग की है. दवा विक्रेताओं ने सरकार से मांग की है कि ऑनलाइन दवा बिक्री पर स्पष्ट कानून लागू किया जाए. 

AIOCD के अध्यक्ष जगन्नाथ शिंदे ने बताया कि 20 मई 2026 को देशभर के दवा विक्रेताओं ने बंद का आह्वान किया है. उन्होंने कहा कि हाल ही में शुरू हुई ऑनलाइन दवा बिक्री की प्रणाली कई महत्वपूर्ण नियमों का उल्लंघन करती है. उन्होंने खासतौर से जीएसआर 817 अधिसूचना का जिक्र किया, जिसे उन्होंने और संगठन ने पहले भी अनुचित करार दिया था. शिंदे के मुताबिक, ऑनलाइन दवा बिक्री से दवा माफिया को बढ़ावा मिलने की आशंका है, जिससे नकली या खराब गुणवत्ता वाली दवाओं के प्रसार का खतरा बढ़ सकता है. 

दवा व्यवसाय वर्तमान में साल 1940 के ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट और साल 1945 के नियमों के तहत संचालित होता है. हालांकि ऑनलाइन दवा बिक्री को लेकर कानून में स्पष्ट प्रावधान नहीं हैं. केंद्र सरकार ने वर्ष 2018 में ऑनलाइन दवा बिक्री को लेकर अधिसूचना जारी की थी, लेकिन आज तक इसे कानूनी रूप से पूरी तरह लागू नहीं किया गया है.

इस मुद्दे पर दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका भी दायर की गई थी और कोर्ट ने ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक लगाने के निर्देश भी दिए थे. इसके बावजूद सरकार द्वारा इस विषय पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है. कोरोना महामारी के दौरान साल 2020 में सरकार ने दवाओं की होम डिलीवरी के लिए विशेष अनुमति दी थी. महामारी समाप्त होने के बाद भी यह व्यवस्था जारी रही, जिससे ऑनलाइन कंपनियां अपने निवेश के आधार पर दवा कारोबार में सक्रिय हो गईं और प्रतिस्पर्धा बढ़ गई.

जगन्नाथ शिंदे के अनुसार, इससे देशभर के लगभग 12.5 लाख दवा विक्रेताओं के व्यवसाय पर असर पड़ रहा है. ग्रामीण क्षेत्रों में दवा वितरण व्यवस्था भी प्रभावित होने की आशंका है. उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था के अनुसार दवा निर्माताओं द्वारा थोक विक्रेताओं और खुदरा विक्रेताओं को निश्चित लाभ मार्जिन दिया जाता है, लेकिन बड़ी कॉरपोरेट कंपनियां भारी छूट देकर बाजार में प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर रही हैं.

एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि दवा विक्रेताओं को डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवा के समान अन्य ब्रांड की दवा देने का अधिकार भी दिया जाए, ताकि वे बाजार प्रतिस्पर्धा में टिक सकें.एसोसिएशन ने यह भी कहा कि सरकार और संबंधित मंत्रालयों को कई बार ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन उचित प्रतिक्रिया नहीं मिलने के कारण 20 मई 2026 को देशव्यापी बंद का निर्णय लिया गया है.