भारत ने ईरान के चाबहार में मौजूद शाहिद बेहश्ती बंदरगाह टर्मिनल के परिचालन के लिए 10 साल के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। इससे भारत को मध्य एशिया के साथ कारोबार बढ़ाने में मदद मिलेगी। चाबहार बंदरगाह ईरान के दक्षिणी तट पर सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में मौजूद हैं।
इस बंदरगाह को भारत और ईरान मिलकर विकसित कर रहे हैं। बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल की मौजूदगी में इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (आईपीजीएल) और ईरान के पोर्ट्स एंड मेरिटाइम ऑर्गेनाइजेशन ने इस अनुबंध पर हस्ताक्षर किए।
एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, आईपीजीएल करीब 12 करोड़ डॉलर निवेश करेगा जबकि 25 करोड़ डॉलर की राशि कर्ज के रूप में जुटाई जाएगी। यह पहला मौका है जब भारत विदेश में मौजूद किसी बंदरगाह का मैनेजमेंट अपने हाथ में लेगा। इस मौके पर सोनोवाल ने कहा कि अनुबंध पर हस्ताक्षर के साथ हमने चाबहार में भारत की लॉन्ग टर्म भागीदारी की नींव रखी है।’’
सोनोवाल ने कहा कि चाबहार न केवल भारत का निकटतम ईरानी बंदरगाह है बल्कि समुद्री परिवहन की नजरिए से भी यह एक शानदार बंदरगाह है। उन्होंने ईरान के परिवहन एवं शहरी विकास मंत्री महरदाद बजरपाश भी मौजूद रहे।
ये 10-साल का समझौता दोनों देशों के बीच साल 2016 में हुए शुरुआती समझौते की जगह लेगा जिसमें भारत को शाहिद बेहश्ती टर्मिनल का परिचालन अधिकार दिया गया था।
हालांकि, उसे सालाना आधार पर रिन्यूएबल करना होता था। भारत क्षेत्रीय व्यापार खासकर अफगानिस्तान से संपर्क बढ़ाने के लिए चाबहार बंदरगाह परियोजना पर जोर दे रहा है।
यह बंदरगाह ‘अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा’ (आईएनएसटीसी) परियोजना के एक प्रमुख केंद्र के तौर पर पेश किया गया है। आईएनएसटीसी परियोजना भारत, ईरान, अफगानिस्तान, आर्मेनिया, अजरबैजान, रूस, मध्य एशिया और यूरोप के बीच माल-ढुलाई के लिए 7,200 किलोमीटर लंबी एक बहुस्तरीय परिवहन परियोजना है। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने ईरान के साथ संपर्क परियोजनाओं पर भारत की अहमियत को रेखांकित करते हुए 2024-25 के लिए चाबहार बंदरगाह के लिए 100 करोड़ रुपये आवंटित किए थे।