Breaking News

हज यात्रियों की मौत पर बोले किरेन रिजिजू- सरकार की कोई लापरवाही नहीं     |   नारी शक्ति वंदन एक्ट पर विशेष सत्र के लिए CM ने नहीं दिया समय: बाबूलाल मरांडी     |   बिहार चुनाव 2025 मतगणना: नबीनगर विधानसभा सीट से JDU उम्मीदवार चेतन आनंद पीछे     |   'मिशन दृष्टि' की कामयाबी पर बोले PM मोदी- युवाओं ने कर दिखाया कमाल     |   ईरान और ओमान के विदेश मंत्रियों की फोन पर बातचीत, क्षेत्रीय हालात पर चर्चा     |  

'ऑपरेशन सिंदूर': जानिए कैसे भारत ने LoC पर आतंकवादी खतरों और दुश्मन की गोलीबारी को किया बेअसर

सरहद पर तैनात भारतीय सेना के जवान किसी भी दुस्साहस का जवाब देने के लिए तैयार है... उनकी निगाहें लक्ष्य पर टिकी हैं... वो दुश्मन को मिट्टी में मिलाने की ताकत रखते हैं। सेना के बुलंद हौसलों को बयां करती ये तस्वीरें जम्मू कश्मीर के तंगधार सेक्टर की है। नियंत्रण रेखा के पास मौजूद ये सबसे संवेदनशील इलाका है।

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मौजूद लीपा घाटी इसके बेहद नजदीक है। ये घाटी रणनैतिक रूप से काफी अहम है, क्योंकि इसी रास्ते से आतंकी भारत में घुसपैठ की कोशिश करते हैं। सात मई की सुबह तंगधार के हालात बिगड़ गए। पाकिस्तानी सेना ने लीपा घाटी के पास भारतीय सेना की चौकियों और रिहायशी इलाकों को निशाना बताते हुए भारी गोलाबारी की। 

भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मौजूद आतंकवादियों और उनके टेरर कैंप को निशाना बनान के लिए 'ऑपरेशन सिंदूर' लॉन्च किया था। भारतीय सेना ने एक बार फिर अपने शौर्य का प्रदर्शन किया... दुश्मन की हर हरकत पर बारीकी से नजर रखी और गलती की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी।

जवान यहां फ्रंट लाइन पर मुस्तैदी के साथ खड़े हैं हर वक्त वो सतर्क रहते हैं.. उनकी कोशिश रहती है कि दुश्मन के हर खतरे को टाल दें। उनके लिए सटीकता कोई विकल्प नहीं बल्कि जरूरत है। हर जवान का कर्तव्य लक्ष्य भेदना है जिसे हर कोई पूरी शिद्दत से निभाता है।

भारतीय सेना को ये हौसला रातोंरात हासिल नहीं हुआ। इन जवानों को सटीक योजना, अथक अभ्यास, अटूट अनुशासन और निरंतर युद्ध के मैदान की तत्परता के जरिए तैयार किया जाता है। आधुनिक हथियारों से लैस भारतीय सेना अनुभवी नेतृत्व के साथ हमारी सरहद की रक्षा करती आ रही है। 

दूसरे सीमावर्ती इलाकों की तरह ही तंगधार में तैनात जवान नियमित रूप से अभ्यास करते हैं। ये उनके प्रशिक्षण का हिस्सा है, जो जांबाजों की तत्परता को दिखाता है। चाहे वो हॉवित्जर तोप हों या फील्ड गन... ये भारी हथियार जमीनी जवाबी कार्रवाई के लिए भारतीय सेना की ताकत हैं। जो जरूरत के हिसाब से दुश्मन को जवाब देने में काम आती हैं।

भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई जमीनी गोलाबारी तक सीमित नहीं है, आसमान में भी दुश्मन की हर हरकत पर पैनी नजर रखी जाती है। इस तरह की मोबाइल रडार यूनिट चौबीस घंटे, सातों दिन आसमान को स्कैन करती हैं और ड्रोन से लेकर सुपरसोनिक विमान तक सब कुछ ट्रैक करती हैं। ये एक मल्टीलेयर डिफेंस सिस्टम का हिस्सा है, जो हमारे सशस्त्र बलों को हवाई खतरों का पता लगाने और उन्हें रोकने में सक्षम बनाती हैं। 

इन सभी चीजों को एक उच्च तकनीक वाला कमांड और नियंत्रण केंद्र कॉर्डिनेट करता है, जो पूरे सेक्टर में तैनात रडार सिस्टम से इनपुट को इकट्ठा करता है। 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान हाल ही में अपग्रेड की गई एल-70 एयर डिफेंस गन की तैनाती भी देखी गई। इसे दिन-रात के ऑपरेशन के लिए अपग्रेड किया गया है। स्वदेशी फायर कंट्रोल रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल साइट्स और थर्मल इमेजिंग से लैस ये एल-70 एयर डिफेंस गन आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत की तकनीकी प्रगति को दिखाता है। 

'ऑपरेशन सिंदूर' आतंकवाद और उसके आकाओं को भारत का करारा जवाब है। ये इस बात का सटीक उदाहरण है कि भारत अपनी सीमा में किसी भी तरह के दुस्साहस को स्वीकार नहीं करेगा। इसका जवाब देश की सेना पूरी ताकत से देगी। जमीन पर बूट से लेकर आसमान में रडार तक भारतीय सेना ने दिखाया कि वो देश की संप्रभुता की रक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी।