हिमाचल प्रदेश मानसून की वापसी के बाद सूखे जैसे हालात का सामना कर रहा है। लंबे समय से जारी सूखे ने किसानों के बीच अपनी फसलों को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। खाद्यान्न और दूसरी नकदी फसलों की खेती के लिए बारिश बहुत जरूरी है। ऐसे में पिछले दो महीनों से बारिश नहीं होने से पूरे राज्य में फसल उत्पादन पर बहुत बुरा असर पड़ा है।
अधिकारियों के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में लगभग 80 फीसदी खेती बारिश पर निर्भर हैं और सिर्फ 20 फीसदी जमीन पर ही सिंचाई सुविधाएं मौजूद हैं। खुश्क हालात की वजह से बहुत कम संख्या में सिर्फ उन्हीं खेतों में बुवाई हो पाई है जहां सिंचाई की सुविधा मौजूद है।
निराश किसानों का कहना है कि मानसून सीजन के दौरान बहुत ज्यादा बारिश होने की वजह से फसलों को नुकसान हुआ। वहीं इस वक्त बारिश की कमी से फसलें सूख रही हैं। किसान सरकार से खुश्क इलाकों में सिंचाई सुविधाओं में सुधार करने की अपील कर रहे हैं ताकि आगे और ज्यादा नुकसान को रोका जा सके।
जानकारों के मुताबिक अगर नवंबर के आखिर तक बारिश हो जाती है, तो सूखे के असर को कम किया जा सकता है। लेकिन अगर तब तक बारिश नहीं होती है, तो फसल की पैदावार को काफी नुकसान होगा।