गुजरात में कच्छ जिले के रेयान मोती गांव में कुछ लोगों ने प्लास्टिक की बोतलों को दोबारा इस्तेमाल करने का नायाब तरीका खोजा है। वे प्लास्टिक की बोतलों का इस्तेमाल चिड़ियों को खाना खिलाने के लिए कर रहे हैं। इस पहल से प्लास्टिक कचरा कम होने में मदद मिल रही है और चिड़ियों को खाना भी मिल रहा है।
समूह ने बताया कि उन्हें नवरात्रि के दौरान एक वीडियो देखने को मिला। उसमें मिट्टी के बर्तनों का ऐसा ही इस्तेमाल किया गया था। उसी वीडियो से प्रेरणा मिली। उन्होंने गांव के श्मशान घाट में चिड़ियों को खिलाने के लिए 50 से ज्यादा प्लास्टिक की बोतलों को मिट्टी के बर्तनों से बांध कर पेड़ों से लटका दिया है।
चिड़ियों को बाजरा, चावल और ज्वार खिलाए जाते हैं। जब चिड़ियां बर्तन का अनाज खाती हैं तो बोतल में भरा अनाज धीरे-धीरे उनमें गिरता है। बोतल में एक बार अनाज भरने पर वो पांच-छह दिन चलता है। अनाज खत्म होने पर बोतलों को फिर से भर दिया जाता है।
इन लोगों का मानना है कि प्लास्टिक कचरे के दोबारा इस्तेमाल के लिए ऐसे ही रचनात्मक तरीके ढूंढे जाने चाहिए, जिससे पर्यावरण को फायदा हो। समाधान न सिर्फ सजावटी हों, बल्कि व्यावहारिक भी हों।