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दिल्ली: स्कूलों में पढ़ाया जाएगा RSS और स्वतंत्रता सेनानियों का पाठ

दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली किताबों में अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को भी शामिल किया जाएगा। इसके लिए शिक्षा विभाग ने राष्ट्रनीति नामक पाठ्यक्रम शुरू किया है। संघ अपनी स्थापना का शताब्दी वर्ष मना रहा है। शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने बताया कि इसके तहत छात्रों को न केवल संघ के आरंभ होने और विचारधारा के बारे में बताया जाएगा बल्कि प्राकृतिक आपदाओं और स्वाधीनता संघर्ष में संघ के स्वयंसेवकों की उल्लेखनीय भूमिका से भी अवगत कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस अध्याय को जोड़ने का मकसद छात्रों में सामाजिक चेतना और नागरिक कर्तव्यों की समझ विकसित करना है।

पाठ्यक्रम में वीर सावरकर, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, सरदार वल्लभभाई पटेल और नेताजी सुभाषचंद्र बोस जैसे नेताओं पर भी विशेष अध्याय होगा। साथ ही, संघ द्वारा किए गए सामाजिक कार्य जैसे रक्तदान शिविर, भोजन आपूर्ति, बाढ़ व भूकंप जैसी आपदाओं में राहत और कोरोना महामारी के दौरान सहयोग को भी शामिल किया जाएगा। शिक्षा निदेशालय के अधिकारी के मुताबिक कार्यक्रम के लिए शिक्षक पुस्तिकाएं तैयार कर ली गई हैं और एससीईआरटी में शिक्षकों का प्रशिक्षण भी जारी है। हालांकि, अभी यह तय होना बाकी है कि किन-किन कक्षाओं में यह नया अध्याय पढ़ाया जाएगा।

इस अध्याय में 1925 में महाराष्ट्र के नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा स्थापित आरएसएस के इतिहास का भी उल्लेख किया जाएगा। इसमें सांस्कृतिक जागरूकता, अनुशासन, सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व पर संगठन के फोकस को रेखांकित किया जाएगा और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी एवं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जैसे नेताओं का उल्लेख किया जाएगा जो इससे जुड़े रहे हैं।

पाठ्यक्रम के तहत, बच्चों को आरएसएस के गठन और इतिहास, उसकी विचारधारा और प्राकृतिक आपदाओं व स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सहायता प्रदान करने में उसके स्वयंसेवकों की भूमिका के बारे में पढ़ाया जाएगा। इन पाठों का उद्देश्य संगठन के बारे में फैली भ्रांतियों को दूर करना भी है। पाठ में बड़े देशव्यापी योगदान स्वतंत्रता संग्राम में आरएसएस की भागीदारी के साथ-साथ उसके सामाजिक कार्यों, जैसे रक्तदान अभियान, खाद्य आपूर्ति, केदारनाथ और बिहार बाढ़ जैसी आपदाओं के दौरान बचाव प्रयास और कोविड महामारी के दौरान राहत गतिविधियों पर प्रकाश डालेंगे।