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देश भर में 'उषा अर्घ्य' के साथ श्रद्धा और आस्था का पर्व छठ सम्पन्न

chhath puja 2024: देश भर के घाटों पर शुक्रवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ पूजा की समाप्ति हुई। सुबह के अर्घ्य को 'उषा अर्घ्य' कहते हैं। सूर्य उगने के साथ होने वाली पूजा प्रार्थना और भजन के बीच फलों, ठेकुआ और गन्ने जैसे प्रसाद के साथ होती है। पूरे बिहार में गंगा नदी और पानी के दूसरे स्रोतों के किनारे लाखों श्रद्धालुओं ने सूर्य देवता को अर्घ्य दिया। दिल्ली में, छठ की पूजा के लिए कई जगह नकली तालाब बनाए गए थे। गीता कॉलोनी में ऐसी ही एक जगह छठ के अंतिम दिन सूर्य को अर्घ्य देने के लिए हजारों श्रद्धालु जमा हुए।

श्रद्धालुओं ने यमुना नदी में झाग की मोटी परत के बावजूद कालिंदी कुंज में घाटों पर पूजा-अर्चना की। सूर्योदय से न चूकें- इसके लिए श्रद्धालु मुंह अंधेरे देश भर में घाटों, तालाबों और पानी के स्रोतों पर पहुंचने लगे। ओडिशा के भुवनेश्वर में व्रतियों ने घुटनों तक पानी में खड़े होकर सूर्य देव को 'अर्घ्य' दिया।

कुछ ऐसी ही तस्वीर मध्य प्रदेश के भोपाल में देखने को मिली। श्रद्धालुओं ने सूर्य देव की पूजा करते हुए ठेकुआ, गन्ना और मौसमी फल चढ़ाए। ठेकुआ गेहूं के आटे, गुड़ या शक्कर और घी से बना पकवान है। सांस्कृतिक महत्व के ठेकुआ को भक्ति और परंपरा का प्रतीक माना जाता है।

आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में छठ के समापन पर नदी में डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालु अंधेरा रहते घाटों पर पहुंच गए। छठ पूजा के आखिरी दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। जम्मू कश्मीर के कठुआ में नदी किनारे छठ मनाने के लिए महिलाएं खूबसूरत साड़ियां पहनकर पहुंचीं। 

छठ मूल रूप से बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है।  भारत के दूसरे हिस्सों और विदेश में रहने वाले इन राज्यों के लोग भी छठ मनाते हैं। यह त्योहार सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित है। ये त्योहार पर्यावरण के साथ संतुलनऔर प्राकृतिक संसाधनों के प्रति कृतज्ञता जैसे विषयों पर आधारित है। छठ पूजा पारिवारिक जुटान के साथ सामाजिक बंधन भी मजबूत करती है।