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चारधाम यात्रा 2026: देवभूमि उत्तराखंड के चारों धामों का इतिहास

चारधाम यात्रा उत्तराखंड राज्य की सबसे पवित्र और प्रसिद्ध धार्मिक यात्रा मानी जाती है, जिसे “देवभूमि उत्तराखंड” की पहचान भी कहा जाता है। हिमालय की गोद में बसे इस राज्य में स्थित चार प्रमुख धाम—यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ—हर साल लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता, पवित्र नदियां और धार्मिक महत्व इस यात्रा को और भी खास बनाते हैं। इस वर्ष भी यात्रा पूरी तरह शुरू हो चुकी है, और आज बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ चारधाम यात्रा का शुभारंभ पूर्ण रूप से हो गया है।

1. यमुनोत्री धाम

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यमुनोत्री धाम उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित है, ये धाम चारधाम यात्रा का पहला पड़ाव माना जाता है। यहां मां यमुना की पूजा की जाती है, जिन्हें सूर्य देव की पुत्री और यमराज की बहन माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि यहां दर्शन करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं। इस मंदिर का निर्माण 19वीं सदी में टिहरी नरेश द्वारा कराया गया था। उत्तराखंड की पहाड़ियों के बीच स्थित यह धाम अपने गर्म जल स्रोत, सूर्य कुंड, के लिए भी प्रसिद्ध है।

2. गंगोत्री धाम 

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गंगोत्री धाम भी उत्तरकाशी जिले में ही स्थित है और मां गंगा को समर्पित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार राजा भगीरथ की तपस्या के बाद मां गंगा यहीं से धरती पर अवतरित हुई थीं। गंगोत्री मंदिर का निर्माण 18वीं सदी में गोरखा सेनापति अमर सिंह थापा ने करवाया था। उत्तराखंड की भागीरथी नदी का उद्गम क्षेत्र होने के कारण यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है, और यहां से कुछ दूरी पर स्थित गौमुख श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है।

3. केदारनाथ धाम

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केदारनाथ धाम उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है। ये धाम भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। ऊंचे हिमालयी क्षेत्र में स्थित यह मंदिर आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है। मान्यता है कि पांडवों ने यहां भगवान शिव की पूजा की थी, और बाद में आदि शंकराचार्य ने इस मंदिर का पुनर्निर्माण कराया। 2013 की आपदा के बाद भी केदारनाथ मंदिर का सुरक्षित रहना उत्तराखंड की धार्मिक शक्ति और विश्वास का प्रतीक माना जाता है।

4. बद्रीनाथ धाम

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बद्रीनाथ धाम उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है। यह धाम चारधाम यात्रा का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह धाम भगवान विष्णु के बद्रीनारायण रूप को समर्पित है। माना जाता है कि भगवान विष्णु ने यहां तपस्या की थी और 8वीं सदी में आदि शंकराचार्य ने इस मंदिर की स्थापना की। अलकनंदा नदी के तट पर स्थित यह धाम उत्तराखंड की आध्यात्मिक पहचान को और मजबूत बनाता है। आज बद्रीनाथ के कपाट खुलने के साथ ही यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है।

इस प्रकार चारधाम यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि उत्तराखंड की संस्कृति, परंपरा और प्राकृतिक सुंदरता का भी अद्भुत संगम है। “देवभूमि” कहे जाने वाले इस राज्य में यह यात्रा जीवन में एक बार अवश्य करने योग्य मानी जाती है, क्योंकि यह श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति के साथ-साथ प्रकृति के करीब होने का अनूठा अनुभव भी कराती है।