सर्दी के मौसम के बाद जैसे जैसे गर्मी बढ़ती है तो वायरल संक्रमण, एलर्जी, बुखार और सांस संबंधी बीमारियां के मरीज भी बढ़ने लगते हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हाल के दिनों में अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या में बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। डॉक्टरों के मुताबिक, मौसम के साथ ही हवा के तापमान में अचानक बदलाव से शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे लोग अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।
शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण हालात को और भी ज्यादा बदतर बना देता है। वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्य की धूल और इंडस्ट्री से निकलने वाला धुआं फेफड़ों में जलन और सूजन पैदा कर सकते हैं, जिससे खांसी, घबराहट, साइनस की जकड़न और अस्थमा के दौरे जैसे लक्षण दिख सकते हैं।
पर्यावरणविदों का कहना है कि सर्दियों के मौसम की तुलना में गर्मी के मौसम में प्रदूषण इतना ज्यादा दिखता नहीं है, इसलिए लोगों की बेफिक्री बीमारियों को दावत दे सकती है। एन95 मास्क पहनने जैसी सावधानियां बरतने से कुछ हद तक स्वास्थ्य समस्याओं को रोकने में मदद मिल सकती है।
लेकिन, शहरी क्षेत्रों में आम मौसमी बीमारियां पहले की तुलना में और ज्यादा गंभीर हो सकती हैं।
गर्मी बढ़ते ही बढ़े वायरल और एलर्जी के मरीज, दिल्ली के अस्पतालों में भीड़
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