केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह रविवार को नई दिल्ली में एक अहम उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे, जिसमें देश में संभावित बाढ़ और हीटवेव की स्थिति से निपटने की तैयारियों की व्यापक समीक्षा की जाएगी। बैठक का मुख्य उद्देश्य आपदा प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करना और विभिन्न एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करना है।
बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी, जिनमें उन्नत तकनीक और रियल-टाइम डेटा इंटीग्रेशन के जरिए बाढ़ पूर्वानुमान और अर्ली वार्निंग सिस्टम को मजबूत करना, बाढ़ और हीटवेव जैसी एक साथ आने वाली आपदाओं से निपटने की तैयारियों को बेहतर बनाना, जनहानि और संपत्ति के नुकसान को रोकने के लिए सामुदायिक जागरूकता और आपदा सहनशीलता कार्यक्रम चलाना, तथा राहत सामग्री और चिकित्सा तैयारियों का पर्याप्त भंडार सुनिश्चित करना शामिल है।
गृह मंत्रालय (MHA) के अनुसार, बैठक के दौरान अमित शाह केंद्रीय एजेंसियों की तैयारियों की समीक्षा करेंगे। साथ ही अर्ली वार्निंग सिस्टम, संसाधनों की तैनाती और विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल का आकलन करेंगे, ताकि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान जनहानि को शून्य और संपत्ति के नुकसान को न्यूनतम रखा जा सके।
गृह मंत्री देशभर में चल रहे दीर्घकालिक बाढ़ नियंत्रण उपायों की प्रगति की भी समीक्षा करेंगे। इसमें महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की सुरक्षा, नदी प्रबंधन से जुड़े प्रयास और पूर्वानुमान प्रणाली में वैज्ञानिक प्रगति शामिल हैं। इसके अलावा, पिछले वर्ष हुई समीक्षा बैठक में लिए गए फैसलों के क्रियान्वयन की स्थिति का भी जायजा लिया जाएगा, ताकि जवाबदेही सुनिश्चित हो और कार्यों को तेजी से पूरा किया जा सके।
गृह मंत्रालय ने कहा कि यह बैठक आपदा प्रबंधन को लेकर केंद्र सरकार के “होल-ऑफ-गवर्नमेंट” और “होल-ऑफ-सोसाइटी” दृष्टिकोण के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। सरकार का फोकस एक सक्रिय, तकनीक-आधारित प्रणाली विकसित करने पर है, जो कई प्राकृतिक आपदाओं का प्रभावी ढंग से सामना कर सके।
पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार ने अमित शाह के मार्गदर्शन में देश के आपदा प्रबंधन ढांचे को काफी मजबूत किया है। इसमें केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) को सशक्त बनाना और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान “जीरो कैजुअल्टी” दृष्टिकोण पर विशेष जोर शामिल है। इस उच्चस्तरीय समीक्षा को सरकार के सक्रिय प्रशासन, नागरिक-केंद्रित आपदा प्रतिक्रिया और हर स्तर पर बेहतर तैयारियों के साथ आपदा-रोधी भारत के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।