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श्रीनगर लाल चौक में 'जय श्री राम' बोलने पर पाबंदी? संत स्वामी गुरसिमरन सिंह मंड ने बताया कड़वा सच

जयपुर में आयोजित ‘संत संसद 2026’ में आस्था के साथ देशप्रेम का विशेष संगम देखने को मिला। इस भव्य कार्यक्रम का आयोजन नेटवर्क 10 न्यूज चैनल द्वारा किया गया। शुरुआत में संतों ने अमर जवान ज्योति पर पहुंचकर शहीदों को नमन किया। वहीं, महिलाओं ने कलश यात्रा के जरिए संतों का जोरदार स्वागत किया। कार्यक्रम में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे और उन्होंने नेटवर्क 10 की इस पहल की सराहना की। 

इस विशेष कार्यक्रम में स्वामी गुरसिमरन सिंह मंड भी शामिल हुए, जहां उन्होंने ‘लव जिहाद’ समेत विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर अपने विचार रखे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि सभी परिवार अपनी बेटियों को इतना सक्षम और आत्मनिर्भर बनाएं कि वे किसी भी प्रकार के गलत प्रभाव में न आएं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को सही दिशा दें और अपने सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति जागरूक रखें।

उन्होंने एक व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि पिछले सप्ताह वह राजस्थान में एक शादी समारोह में गए थे, जो एक सनातनी परिवार की शादी थी। वहां 18 मुस्लिम वेटर काम कर रहे थे, जो पढ़े-लिखे थे। इस संदर्भ में उन्होंने आशंका जताते हुए कहा कि ऐसे लोग हमारी बहू-बेटियों को बहला-फुसला सकते हैं।

उन्होंने कहा कि माता-पिता अपने बच्चों पर ध्यान दें। उन्होंने अपील की कि विवाह अपने ही समाज और परंपरा के भीतर किया जाए और इस मुद्दे पर संत समाज को भी आगे आकर आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि नेटवर्क 10 के माध्यम से संतों को इस विषय पर जागरूकता फैलानी चाहिए।

स्वामी गुरसिमरन सिंह मंड ने श्रीनगर के लाल चौक का एक अनुभव भी साझा किया, जहां उन्होंने दावा किया कि उन्हें “जय श्री राम”, “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” जैसे नारों के उच्चारण से रोका गया और उनकी गतिविधियों पर निगरानी रखी गई। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की परिस्थितियों से डरने की बजाय समाज को एकजुट होकर अपने अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए खड़ा होना चाहिए।

इसके अलावा, उन्होंने गौ-तस्करी से जुड़े मुद्दे पर भी चिंता व्यक्त की और कहा कि इस प्रकार की घटनाएं बेहद निंदनीय हैं। उन्होंने कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने नेटवर्क 10 के एडिटर-इन-चीफ संजय गिरी से अपील की कि वे इन मुद्दों को सरकार तक पहुंचाएं, ताकि समाज में सुरक्षा, विश्वास और सांस्कृतिक संतुलन बनाए रखा जा सके।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्गों को मिलकर शांति, एकता और पारस्परिक सम्मान के साथ आगे बढ़ना चाहिए, तभी एक सशक्त और सुरक्षित राष्ट्र का निर्माण संभव है।