Breaking News

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज     |   लखनऊ अग्निकांड मामले में SIT की जांच शुरू     |   राजस्थान के 19 जिलों में आंधी-बारिश का येलो अलर्ट     |   लखनऊ अग्निकांड: सभी आरोपियों को जेल भेजा गया     |   CUET UG के नतीजे घोषित     |  

जॉन अब्राहम ने सीजेआई को लिखा पत्र, आवारा कुत्तों के संबंध में जारी निर्देश की समीक्षा की मांग की

New Delhi: अभिनेता जॉन अब्राहम ने मंगलवार को प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) बी. आर. गवई को पत्र लिखकर दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) क्षेत्र से आवारा कुत्तों को हटाने के उच्चतम न्यायालय के हालिया निर्देश की समीक्षा करने और उसमें संशोधन का आग्रह किया। सभी आवारा कुत्तों को ‘‘जल्द से जल्द’’ सड़कों से हटाकर स्थायी रूप से आश्रय स्थलों में भेजने का उच्चतम न्यायालय द्वारा अधिकारियों को निर्देश दिए जाने के एक दिन बाद अभिनेता ने ये पत्र लिखा है।

जॉन अब्राहम को ‘पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स’ (पेटा) इंडिया का पहला मानद निदेशक नियुक्त किया गया था। उन्होंने कहा कि कुत्ते आवारा नहीं हैं, बल्कि समुदाय का हिस्सा हैं और बहुत से लोग इनसे विशेष लगाव रखते हैं।

अब्राहम ने कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि आप इस बात से सहमत होंगे कि ये ‘आवारा’ नहीं, बल्कि समुदाय का हिस्सा हैं, जिनसे कई लोग विशेष लगाव रखते हैं और प्रेम करते हैं, खासकर दिल्ली के लोग...।’’ अभिनेता ने कहा कि ये निर्देश पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) नियम, 2023 और इस मुद्दे पर शीर्ष अदालत के पिछले फैसलों के खिलाफ है, जिनमें हमेशा व्यवस्थित नसबंदी कार्यक्रम" का समर्थन किया गया है।

जयपुर और लखनऊ जैसे शहरों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, ‘‘एबीसी नियम कुत्तों को हटाने की अनुमति नहीं देते, बल्कि उनकी नसबंदी और टीकाकरण करने और उनके पूर्ववत स्थान पर वापस छोड़ने का प्रावधान करते हैं। जहां एबीसी कार्यक्रम को ईमानदारी से लागू किया गया, वहां ये कारगर साबित हुआ।’’

उन्होंने कहा, ‘‘दिल्ली भी ऐसा कर सकती है। नसबंदी के दौरान कुत्तों को रेबीज का टीका लगाया जाता है और इसके बाद कुत्ते शांत हो जाते हैं, उनके खूंखार होने और काटने की घटनाएं कम हो जाती हैं। चूंकि कुत्ते अपने इलाके को पहचानते हैं, इसलिए वे बिना नसबंदी और बिना टीकाकरण वाले कुत्तों को अपने इलाके में घुसने नहीं देते।’’ अभिनेता के अनुसार, सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने से समस्या का समाधान नहीं होगा।

आवारा कुत्तों के काटने से, विशेष रूप से बच्चों में होने वाली रेबीज की समस्या के कारण "अत्यंत गंभीर" स्थिति के मद्देनजर उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को दिल्ली-एनसीआर के प्राधिकारों को निर्देश दिया कि वे सभी आवारा कुत्तों को "शीघ्रतापूर्वक" उठाएं और उन्हें आश्रय स्थलों में रखें।

न्यायालय ने कहा कि समय के साथ कुत्तों के लिए आश्रय स्थलों की संख्या बढ़ानी होगी। न्यायालय ने दिल्ली के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे छह से आठ हफ्ते के अंदर लगभग 5,000 कुत्तों के लिए आश्रय स्थल बनाएं।

आवारा कुत्तों की समस्या को ‘‘अत्यधिक गंभीर’’ बताते हुए न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने कई निर्देश पारित किए और चेतावनी दी कि यदि कोई व्यक्ति या संगठन आवारा कुत्तों को उठाने के काम में बाधा डालेगा, तो शीर्ष अदालत उसके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करेगी।