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प्रदूषण से निजात के लिए कृत्रिम बारिश कराने की कोशिश, जानिए कैसे कराई जाती है क्लाउड सीडिंग

Delhi: दिल्ली में हवा की गुणवत्ता लगातार खराब दर्ज की जा रही है। दिल्ली सरकार ने मंगलवार को प्रदूषण के कहर को कम करने के इरादे से आर्टीफिशयल रेन यानी कृत्रिम बारिश का प्रस्ताव पास कर दिया है। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर दिल्ली में कृत्रिम बारिश कराने की अपील की है।

कृत्रिम बारिश क्लाउड सीडिंग के जरिए कराई जाती है। इस तकनीक से बारिश या बर्फ पैदा करने की क्षमता को बढ़ाया जाता है। ऐसा करने से एक निश्चित इलाके में कृत्रिम बारिश कराई जाती हैै। क्लाउड सीडिंग की मदद से कृत्रिम बारिश की पहली कोशिश 1946 में न्यूयॉर्क के एक केमिस्ट विंसेंट शेफ़र ने की थी।

जानकारों की मानें तो दिल्ली में गंभीर वायु प्रदूषण से निपटने के लिए एक आपातकालीन उपाय के रूप में क्लाउड सीडिंग के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं।क्लाउड सीडिंग के नए तरीकों में इलेक्ट्रिक चार्ज देने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल करना भी शामिल है। इससे कण निर्माण को प्रेरित करने के लिए बारिश या लेजर पल्स के लिए दबाव बढ़ाना होता है।  दोनों के लिए सटीक तकनीक और परिस्थितियों का होना बहुत जरूरी है।

दिल्ली सरकार क्लाउड सीडिंग पर विचार कर रही है। जानकार बता रहे हैं कि क्लाउड सीडिंग से इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि टारगेट एरिया में बारिश होगी ही। एक्सपर्ट का ये भी तर्क है कि दिल्ली में प्रदूषण के मुद्दे के लिए आपातकालीन उपायों के बजाय ज्यादा टिकाऊ विकल्पों की दरकार है।