New Delhi: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को झटका देते हुए उच्चतम न्यायालय ने तेलंगाना उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी जिसमें असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी के खिलाफ आरोप लगाने के मामले में उन्हें एक सप्ताह की अग्रिम जमानत दी गई थी।
न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने खेड़ा और अन्य को नोटिस जारी कर तेलंगाना उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली असम सरकार की याचिका पर उनका जवाब मांगा है।
असम सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि असम में दर्ज एक मामले में जमानत के लिए तेलंगाना उच्च न्यायालय में खेड़ा का आवेदन करना ‘‘प्रक्रिया का पूर्ण दुरुपयोग’’ है और यह अपनी सुविधा के हिसाब से ‘‘अनुकूल मंच चुनने’’ का मामला प्रतीत होता है।
याचिका पर नोटिस जारी करते हुए पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश के अमल पर रोक रहेगी। पीठ ने मामले में सुनवाई के लिए तीन सप्ताह बाद की तारीख तय की। उच्च न्यायालय ने 10 अप्रैल को खेड़ा को कुछ शर्तों के साथ एक सप्ताह की अग्रिम जमानत दे दी और उन्हें संबंधित अदालत में आवेदन दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया।
कांग्रेस नेता ने पांच अप्रैल को संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया था कि असम के मुख्यमंत्री की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा के पास कई पासपोर्ट और विदेशी संपत्ति है, जिसे राज्य में नौ अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए मुख्यमंत्री के चुनावी हलफनामे में घोषित नहीं किया गया है।
सरमा दंपति ने इन आरोपों को खारिज किया था और इसे झूठा एवं मनगढंत बताया था। इन आरोपों को लेकर कांग्रेस नेता के खिलाफ गुवाहाटी अपराध शाखा थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 175 (चुनाव के संबंध में झूठा बयान), 35 (निजी सुरक्षा के अधिकार) और 318 (धोखाधड़ी) के तहत मामला दर्ज किया गया था।