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Delhi: यमुना में झाग बनने पर सियासत तेज, आंकड़ों से समझिए क्यों बदहाल होती जा रही है यमुना

हर साल की तरह इस साल भी दिल्ली में यमुना नदी सफेद झाग की मोटी परत से ढक गई है। यमुना का ये हाल होते ही बीजेपी और आम आदमी पार्टी में जुबानी जंग शुरू हो गई है। यमुना की इस हालत के लिए दोनों ही एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने अपने दावे को सही बताने के लिए  गुरुवार को यमुना नदी में डुबकी लगाई थी। इसके बाद उन्हें सांस लेने में कठिनाई और स्किन में जलन की शिकायत हुई। हालत खराब होने की वजह से वीरेंद्र सचदेवा को दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया।

विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों का दावा है कि यमुना नदी का पानी सेहत के लिए बहुत बड़ा खतरा हो गया है। 

आईआईटी कानपुर की रिपोर्ट के मुताबिक पर्यावरणीय और मानवजनित वजह जहरीले झाग का कारण बनते हैं। जैसे-जैसे मानसून की विदाई होती है, यमुना का जलस्तर कम होने लगता है। इसके अलावा यमुना का पानी गर्म होने की वजह से पानी की सतह के तनाव को कम कर देता है।

विशेषज्ञों की मानें तो यमुना में झाग नदी में मौजूद पौधों के सड़ने और सीवेज से निकलने वाले गंदे पानी की वजह से बनते हैं। इन झागों में अमोनिया और फॉस्फेट का लेवल हाई होने से सांस के मरीजों और स्किन के लिए खतरा बना रहता है।

मुख्यमंत्री आतिशी ने बताया कि यमुना के पानी में अमोनिया के हाई लेवल ने दिल्ली में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट को भी प्रभावित किया है। इससे दिल्ली के बड़े इलाके में पीने के पानी की सप्लाई में बड़ी दिक्कत पैदा हो गई है। 

विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों ने राज्य और केंद्र सरकार दोनों से यमुना में प्रदूषण को रोकने की अपील की है। उम्मीद है कि सियासी दल मतभेदों को भुलाकर यमुना की सफाई के लिए मिलकर कोशिश करेंगे, जिससे दिल्ली और दिल्लीवालों को बड़ी राहत मिलेगी।