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टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा के निष्कासन की सिफारिश कर सकती है लोकसभा आचार समिति

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा पर ‘रिश्वत लेकर सवाल पूछने’ संबंधी आरोपों की जांच कर रही लोकसभा की आचार समिति उनके संसद के निचले सदन से निष्कासन करने की सिफारिश कर सकती है। बीजेपी सांसद विनोद कुमार सोनकर की अध्यक्षता वाली समिति अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट को स्वीकारने के लिए गुरुवार शाम को बैठक करेगी। बैठक में विपक्षी सदस्यों के रिपोर्ट की सिफारिशों का पुरजोर विरोध किए जाने की संभावना है।

जानकारी मिली है कि ड्राफ्ट रिपोर्ट में मोइत्रा के आचरण को और इसे "ज्यादा आपत्तिजनक, अनैतिक, जघन्य और आपराधिक" बताया गया है। साथ ही सरकार से मामले में समयबद्ध कानूनी और संस्थागत जांच का भी आह्वान किया गया है। ड्राफ्ट रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार को मोइत्रा और व्यवसायी दर्शन हीरानंदानी के बीच पैसे के कथित लेन-देन की जांच करनी चाहिए। 

समिति ने ये भी कहा है कि बीएसपी सांसद दानिश अली को दो नवंबर को आखिरी बैठक के दौरान मोइत्रा से सोनकर के पूछे गए सवालों के बारे में 'तोड़-मरोड़कर बात रखने" के लिए फटकार लगाई जानी चाहिए। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मोइत्रा के खिलाफ शिकायत की थी। उन्होंने मोइत्रा पर गिफ्ट के बदले व्यवसायी दर्शन हीरानंदानी के इशारे पर अडाणी समूह को निशाना बनाने के लिए लोकसभा में सवाल पूछने का आरोप लगाया था। 

15 सदस्यीय आचार समिति में बीजेपी के सात, कांग्रेस के तीन और बीएसपी, शिवसेना, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (वाईएसआरसीपी) और जेडीयू के एक-एक सदस्य शामिल हैं। दो नवंबर को समिति की बैठक में मौजूद सभी पांच विपक्षी सदस्य ये कहते हुए बैठक से बाहर चले गए थे कि सोनकर ने मोइत्रा की यात्रा, होटल में ठहरने और टेलीफोन पर बात करने के संबंध में उनसे व्यक्तिगत और अशोभनीय सवाल पूछे थे।

दुबे ने बुधवार को कहा कि लोकपाल ने मोइत्रा के कथित भ्रष्टाचार की शिकायत पर उनके खिलाफ सीबीआई जांच का आदेश दिया है। इसके जवाब में मोइत्रा ने कहा कि सीबीआई को पहले 13,000 करोड़ रुपये के अडाणी कोयला "घोटाले" में एफआईआर दर्ज करने की जरूरत है।