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दिल्ली: गणतंत्र दिवस पर दिखी देश की ताकत, राष्ट्र का गौरव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली में आयोजित 76वें गणतंत्र दिवस समारोह की अगुवाई की। रविवार सुबह सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युद्ध स्मारक पर देश के लिए कुर्बान हो जाने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने झंडोत्तोलन किया। राष्ट्रपति मुर्मू के राष्ट्रीय ध्वज फहराने के साथ कर्तव्य पथ पर परेड की शुरुआत हो गई। परेड में सेना, अर्धसैनिक बल, एनसीसी कैडेट की टुकड़ियों के अलावा अलग-अलग राज्यों और सरकारी विभागों की झांकियां शामिल थीं। 

मार्च पास्ट की शुरुआत 300 कलाकारों के समूह ने की। रंग-बिरंगी पोशाकों में सजे कलाकारों ने 'सारे जहां से अच्छा' की धुन पर प्रस्तुति दी। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए कलाकार तरह-तरह के वाद्य यंत्र बजा रहे थे। वायुसेना की 129 हेलीकॉप्टर यूनिट के एमआई-17 हेलिकॉप्टरों ने कर्तव्य पथ पर मेहमानों और दर्शकों पर फूल बरसाए। दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल भवनीश कुमार परेड कमांडर थे। 

परेड कमांडर के बाद परमवीर चक्र और अशोक चक्र सहित सर्वोच्च वीरता पुरस्कारों के विजेता थे। घुड़सवार दस्ते का नेतृत्व करने वाली पहली सैन्य टुकड़ी 61 कैवेलरी थी। इसका नेतृत्व लेफ्टिनेंट अहान कुमार ने किया।
साल 1953 में स्थापित 61 कैवलरी दुनिया में इकलौती सक्रिय घुड़सवार रेजिमेंट है। इसके बाद नौ मशीनीकृत टुकड़ियों और नौ मार्चिंग टुकड़ियों ने परेड की।

सेना की मार्चिंग टुकड़ियों में ब्रिगेड ऑफ द गार्ड्स, जाट रेजिमेंट, गढ़वाल राइफल्स, महार रेजिमेंट, जम्मू और कश्मीर राइफल्स रेजिमेंट और सिग्नल कोर शामिल थे। भारतीय नौसेना की टुकड़ी में 144 कर्मचारी थे। इनकी अगुवाई लेफ्टिनेंट कमांडर साहिल अहलूवालिया ने की। इसके बाद आत्मनिर्भरता का संदेश देती नौसेना की झांकी थी। झांकी का संदेश था कि नौसेना अपने बूते देश की समुद्री सीमाओं की बखूरी रक्षा कर सकती है।

झांकी में पिछले दिनों राष्ट्र को समर्पित किए गए तीन अग्रणी युद्धपोतों- आईएनएस सूरत, आईएनएस नीलगिरी और आईएनएस वाघशीर को दिखाया गया। वायुसेना की टुकड़ी में स्क्वाड्रन लीडर महेंद्र सिंह गराती के नेतृत्व में चार अधिकारी और 144 वायु सैनिक शामिल थे। कर्तव्य पथ पर पहली बार सेना के तीनों सेवाओं की एक साथ झांकी निकाली गई। झांकी की थीम थी, 'संयुक्तता'।

इसमें एक युद्ध भूमि दिखलाई गई, जिसमें स्वदेशी अर्जुन युद्ध टैंक, तेजस लड़ाकू विमान और उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर के साथ जमीन, पानी और हवा में एक साथ ऑपरेशन दिखाया गया। तीनों सेवाओं की झांकी ने 'सशक्त और सुरक्षित भारत' का संदेश दिया। इस बार गणतंत्र दिवस पर पहली बार इंडोनेशिया की एक मार्चिंग टुकड़ी और एक बैंड ने हिस्सा लिया।

परेड का एक आकर्षण पूर्व सैनिकों की झांकी थी। 'विकसित भारत की ओर सदैव अग्रसर' थीम के साथ ये झांकी राष्ट्र के पूर्व सैनिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि थी। खेल जगत में भारत का नाम रोशन करने वाले कई दिग्गज खिलाड़ी भी परेड का हिस्सा थे। मार्च पास्ट के दौरान कर्तव्य पथ के दोनों ओर दर्शकों का हुजूम था। खास मेहमानों में कई केंद्रीय मंत्री, देश के सर्वोच्च सैन्य अधिकारी, विदेशी मेहमान और वरिष्ठ अधिकारी थे।

इस साल गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि  इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो थे। उनके साथ कुछ खास वैश्विक नेता भी थे। विदेशी मेहमान सात दशकों से ज्यादा समय से गणतंत्र दिवस समारोहों की शोभा बढ़ाते रहे हैं।