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दिल्ली ब्लास्ट के बाद हाईअलर्ट पर वेस्ट यूपी, मेरठ ज़ोन में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था

Meerut News: मेरठ ज़ोन के एडीजी भानु भास्कर ने नेटवर्क 10 न्यूज़ से ख़ास बातचीत में बताया कि अलग अलग प्वाइंट्स पर बैरियर लगाकर चेकिंग की जा रही है। अंतरप्रदेशीय अंतरजनपदीय प्वाइंट्स पर चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। रिवर मार्ग पर भी सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पुलिस मित्र साइबर मित्र सोशल मीडिया पर निगरानी रख रहे हैं। रेलवे स्टेशन बस स्टेशन पर सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। एटीएस एसटीएफ भी अपने स्तर से अभियान चला रही है। संदिग्ध व्यक्तियों पर पैनी नज़र रखी जा रही है। एडीजी ने कहा कि नागरिक बाहर आकर सारी सुचनाएं दे रहे हैं। सूचना देने वाले के नाम को गोपनीय रखा जा रहा है।

इस बार आतंकियों के डॉक्टर मॉड्यूल पर एडीजी मेरठ ज़ोन भानु भास्कर ने कहा कि कुछ लोग पथभ्रष्ट होकर गलत रास्ते पर चले गए हैं। जनता आगे बढ़कर ऐसे लोगों को बेनकाब करने के लिए सहयोग कर रही है। भानु भास्कर ने कहा कि मेरठ ज़ोन की सीमा दिल्ली पंजाब हरियाणा राजस्थान यूपी हिमाचल और उत्तराण्ड से मिलती है। एक दूसरे से लगातार पुलिसकर्मी संवाद कर रहे हैं। साइबर और सोशल मीडिया पर निगरानी रखी जा रही है। वो कहते हैं कि इस बार पढ़े लिखे लोगों को प्रभावित करने की कोशिश की गई है। लेकिन जनता के सहयोग से ऐसे लोगों पर शिकंजा कसा जा रहा है।

अब तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पूर्व में पकड़े गए आतंकी,

19 अक्तूबर 2018: मेरठ कैट का जवान कंचन पाकिस्तान को सूचना भेजते पकड़ा।

27 नवंबर 2015: एसटीएफ ने मेरठ कैंट से आईएसआई एजेंट इजाज को गिरफ्तार किया।

16 अगस्त 2014: मेरठ से संदिग्ध आईएसआई एजेंट आसिफ अली गिरफ्तार।

10 जनवरी 2009: सहारनपुर से आईएसआई एजेंट आमिर अहमद उर्फ भूरा गिरफ्तार।

12 दिसंबर 2008: सीआरपीएफ कैंप में आतंकी हमले से जुड़े लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी फहीम अंसारी गिरफ्तार।

21 जून 2007: बिजनौर में भारी मात्रा में आरडीएक्स के साथ हुजी के दो आतंकी गिरफ्तार।

23 अगस्त 2005: लश्कर-ए-तैयबा के चीफ कोऑर्डिनेटर अबु रज्जाक मसूद का मुजफ्फरनगर कनेक्शन मिला:

10 मार्च 2005 मेरठ से खलील हुसैन शाह नाम का आईएसआई एजेंट गिरफ्तार।

18 अप्रैल 2004 मेरठ से रूबी बेगम नाम की आईएसआई एजेंट गिरफ्तार।

14 मार्च, 2003 : मुजफ्फरनगर से जैश-ए-मोहम्मद के दो आतंकी सज्जाद और इत्तफाकुल गिरफ्तार।

15 जुलाई 2002: मुजफ्फरनगर से एक आईएसआई एजेंट गिरफ्तार।

9 जुलाई 2002: मुरादाबाद से हिज्बुल मुजाहिदीन से ताल्लुक रखने वाले पांच आतंकी गिरफ्तार।

इस बार जितने भी आरोपी इस बार गिरफ्त में आए हैं वो सब डॉक्टर हैं, चाहे वो सहारनपुर के डॉक्टर आदिल की बात कर लें डॉक्टर उमर की बात कर लें डॉक्टर परवेज़ की बात कर लें या डॉक्टर शाहीन की बात कर लें जिन पर लगातार शिकंजा कसा जा रहा है। सहारनपुर के रहने वाले जम्मू कश्मीर की गिरफ्त में डॉक्टर आदिल के बारे में पूछे गए सवाल पर एडीजी मेरठ ज़ोन ने कहा कि ज्यादा जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती है। लेकिन वो बार बार जनता के सहयोग की बात ज़रुर कर रहे हैं। पढ़े लिखे लोगों के आतंकी बनने के इतिहास पर नज़र डालें तो दो हज़ार चौबीस में केरल में एक मेडिकल छात्रा को आईएसआईएस के ऑनलाइन सेल से जुड़ने और फंडिंग में मदद के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। दो हज़ार तेईस में मुंबई में मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने डार्क वेब से बम बनाने की कोडिंग सीख तीन युवकों को प्रशिक्षण दिया था। दो हज़ार बाइस में दिल्ली में एक जूनियर डॉक्टर पर कट्टरपंथी समूह को शरण देने का आरोप लगा था। दो हज़ार इक्कीस में बेंगलुरु में आईटी कंपनी में काम करने वाले कर्मचारी ने ऑनलाइन विदेशी फंडिंग के ज़रिए दो लाख डॉलर की क्रिप्टो राशि आतंकी समर्थकों को दी थी।