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मेरठ में महिला वैज्ञानिक को रखा 27 घंटे डिजिटल अरेस्ट, ठगों ने उड़ाए 8.30 लाख रूपये

मेरठ में साइबर लुटेरों ने महिला वैज्ञानिक डॉ. निशा वर्मा को 27 घंटे डिजिटल अरेस्ट रखा। बच्चों की किडनैपिंग और मनी लॉन्ड्रिंग में फंसाने की धमकी दी। सैलरी अकाउंट के 99% पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहा। महिला वैज्ञानिक से 8.30 लाख रुपए अपने अकाउंट में ट्रांसफर करा लिए। पुलिस ने 11 दिसंबर को रिपोर्ट दर्ज कर साइबर अपराधियों की तलाश शुरू कर दी है।

आपको बता दे पल्लवपुरम फेस-2 निवासी डॉ. निशा वर्मा मोदीपुरम स्थित भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान में वैज्ञानिक हैं। निशा वर्मा की ओर से दर्ज FIR के मुताबिक, 10 दिसंबर को उनके पास एक कॉल आई। कॉल किसी महिला की थी। महिला ने कहा कि वह टेलिकॉम डिपार्टमेंट में अधिकारी हैं। आपके नंबर से गलत गतिविधियां हो रही हैं।

जिसके बाद  उनके मोबाइल पर वीडियो कॉल आई। कॉल करने वाले ने कहा कि वह साइबर क्राइम डिपार्टमेंट से है। निशा वर्मा को कॉल करने वाले ने बताया कि आपका मोबाइल मनी लॉन्ड्रिंग और मानव तस्करी में इस्तेमाल हो रहा है। 17 परिवारों के बच्चों का अपहरण हो गया है। हमारे डिपार्टमेंट पर सवाल उठ रहे हैं। हमें आपको वहां आकर गिरफ्तार करना पड़ेगा। अगर आप कहें तो आपको हम डिजिटल सर्विलांस में भी ले सकते हैं। निशा वर्मा इस पूरे वाकये से दहशत में आ गईं।

वही इस बीच कॉल करने वाले ने निशा वर्मा को उनके बेटे को जान से करने का भी डर दिखाया। साइबर ठगो ने उनके सैलरी अकाउंट के 99% अपने खाते में जमा करवा लिए। निशा ने 8.30 लाख रुपए उसके बताए अकाउंट में ट्रांसफर कर दिए।

मेरठ में इससे पहले रिटायर्ड बैंक मैनेजर से ठगे थे 1.73 करोड़
मेरठ में लगातार साइबर लुटेरे लोगों को शिकार बना रहे हैं। इससे पहले साइबर अपराधियों ने 17 सितंबर को पांडव नगर बैंक से रिटायर्ड सूरज प्रकाश को CBI अधिकारी बताकर 5 दिन तक घर में डिजिटल अरेस्ट रखा। उनसे 1.73 करोड़ रुपए ट्रांसफर करा लिए। 8 नवंबर को शास्त्री नगर निवासी CDA से रिटायर एससी जैन को भी मानव अंगों की तस्करी में फंसने की बात कहकर 15 लाख रुपए अपने अकाउंट में ट्रांसफर करा लिए।

वहीं इस पूरे मामले में मेरठ के एसपी क्राइम अवनीश कुमार कि माने तो रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। जिस अकाउंट में पैसे ट्रांसफर किए गए हैं, उनको फ्रीज के लिए बैंक को रिपोर्ट भेज दी गई है। उन्होंने कहा कि पुलिस या CBI किसी को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती है। ऐसी कॉल आने पर उस पर ध्यान न दें। फोन बंद करने के बाद अपने परिजनों और पुलिस को सूचना दें। साइबर क्राइम से सिर्फ जागरूकता से ही बचा जा सकता है।