मेरठ में 9 जनवरी की रात लिसाड़ी गेट के सोहेल गार्डन में राजमिस्त्री मोइन उसकी पत्नी आसमां और 3 मासूम बेटियों की लाश मिली। खून से सनी ये लाशें बोरों और चादर में पोटली की तरह भरी गई। 4 लाशें कमरे में रखे बेडबॉक्स में और 1 लाश पलंग के नीचे थी। नृशंस हत्याकांड का मेरठ पुलिस ने शनिवार को खुलासा कर दिया। बेहद चौंकाने वाला सच सामने आया है। मुख्य आरोपी नईम ने सिर्फ 5 लाख रुपयों की खातिर अपने दत्तक बेटे सलमान के साथ मिलकर इस हत्याकांड को अंजाम दिया। नईम ने सौतेले भाई मोइन उसके पूरे परिवार की हत्या कर दी। शनिवार को आरोपी नईम बाबा पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। वहीं उसका दत्तक बेटा आरोपी सलमान मुठभेड़ में अरेस्ट हुआ है उसके पैर में गोली लगी है।
ब्लाइंड मर्डर के खुलासे की पूरी INSIDE स्टोरी
सोहेल गार्डन में राजमिस्त्री मोइन अपनी पत्नी और 3 मासूम बेटियों के साथ रहता था। 8 जनवरी को मोइन ने अपने नए मकान का लेंटर डाला। शाम को पूरा परिवार घर में अंदर गया तो दूसरे दिन 9 जनवरी तक घर से बाहर नहीं निकला। पड़ोसियों, रिश्तेदारों ने दिनभर घर में हलचल नहीं सुनी। घर के मेन गेट पर बाहर से ताला पड़ा था। दरवाजा बंद था। रिश्तेदारों, पड़ोसियों ने फोन किए तो किसी ने कॉल नहीं उठाई। देर शाम लगभग 7 बजे मोइन का भाई, पड़ोस में रहने वाली भाभी नजराना उसके घर पहुंचे। गेट का ताला तोड़ा, दरवाजा खोला तो देखा अंदर पलंग के बॉक्स में 4 लाशें बोरी में बंद पड़ी थी। उनसे खून बह रहा था। बाहर चादर की पोटली में एक लाश बंधी थी। पूरे परिवार की हत्या कर दी गई। जिसने भी ये मंजर देखा तो रुह कांप गई। मौके पर एडीजी ध्रुवकांत ठाकुर, डीआईजी कलानिधि नैथानी, एसएसपी डॉ. विपिन ताडा, एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह सहित अफसर पहुंचे। इतनी नृशंस सामूहिक हत्याकांड ने कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए थे। पूरे मामले में मृतका आसमां के भाई की तरफ से नईम, तसलीम और भाभी नजराना पर नामजद हत्या का मुकदमा दर्ज कराया गया था।
एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने शनिवार को पुलिस लाइन में प्रेसवार्ता में 5 हत्याओं के कत्ल की पूरी कहानी बताई। पुलिस मुठभेड़ में अरेस्ट हुए हत्याकांड के आरोपी सलमान ने पुलिस को हत्या की वजह से लेकर हर बात बताई।
उन्होंने बताया कि मृतक मोइन कुल 7 भाई था। इसमें सलमानी और नईम उसके सौतेले भाई हैं। मोईन ने कोरोना से भी पहले नईम से 5 लाख रुपए उधार लिए थे। रुढ़की में मोइन परिवार संग रहता था, लेकिन वो आर्थिक तंगी में था। तब नईम टाइल्स का कारोबार करता था उसने 5 लाख रुपए उधार दे दिए। लेकिन नईम ने वो रुपया नहीं चुकाया। कई बार मांगने पर भी मोइन ने पैसा नहीं दिया। उल्टा उसने मेरठ में एक प्लॉट खरीदा, अपना मकान बनाने लगा। जब नईम ने देखा कि उसके 5 लाख रुपए डूब रहे हैं,उल्टा मोइन अपना मकान बना रहा है तो उसने अपने उधार रुपए वसूलने के लिए मोइन के पूरे परिवार की हत्या का प्लान बनाया। मोइन उसके परिवार को खत्म कर वो ये मकान और संपत्ति हड़प लेगा।
जहां आरोपी नईम 20 साल से जरायम की दुनिया में राज कर रहा है। वो शातिर किस्म का अपराधी है। मेरठ और महाराष्ट्र में 3 शादियां कर चुका था। पहले ही उस पर महाराष्ट्र और दिल्ली में हत्या के मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस को लगातार उसकी तलाश थी। लेकिन नईम तांत्रिक बाबा के नाम मशहूर था। वो वेश बदलकर पुलिस को चकमा देने में माहिर था। इतने सालों से पुलिस से बचने के कारण नईम के लिए हत्या करना बेहद आसान काम था। इसी मंशा के चलते उसने मेरठ में रहने वाले अपने सगे भाई तसलीम और दत्तक पुत्र सलमान के साथ मिलकर मोइन के परिवार को मारने की योजना बनाई। दिसंबर से नईम, इन हत्याओं को करने के फिराक में था लेकिन मौका 8 जनवरी की रात को मिला।
आपको बता दे 8 जनवरी की रात जब मोइन के घर का लेंटर पड़ा तब नईम अपने बेटे सलमान के साथ मेरठ में था। दोनों ने सोचा कि आज खुशी का मौका है। मोइन के घर लेंटर पड़ने की दावत खाएंगे और तभी इनका काम तमाम कर देंगे। ये सोचकर बाप, बेटे दोनों 8 जनवरी की रात मोइन के घर पहुंचे। सभी 7 लोगों ने मिलकर खाना खाया इसके बाद पूरा परिवार उसी कमरे में सो गया। नईम और सलमान उसी रोज पूरे परिवार की हत्या करने की फिराक में थे।
देर रात जब पूरा परिवार गहरी नींद में था तब नईम सलमान उठे। नींद में ही 5 लोगों की हत्याएं कर दी। नईम ने सोतेले भाई मोइन के सिर पर रॉड से वार कर उसे मार डाला। उसी वक्त बेटे सलमान ने चाची आसमां के सिर पर रॉड से वार कर हत्या कर दी। इसके बाद 2 बच्चियों के भी सिर पर रॉड से वार कर उनकी हत्या की गई। अंत में छोटी 3 साल की मासूम बच्ची को गला घोंटकर मार डाला।
जिसके बाद नईम और सलमान की नफरत, घृणित मानसिकता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इन आरोपियों ने 3 मासूम बच्चियो को भी नहीं बख्शा। दोनों आरोपियों को शंका थी कि कहीं 5 में से कोई भी जिंदा न बच जाए इसलिए वो हत्या के 5 घंटे बाद तक वहीं लाशों के साथ सोए रहे। अलसुबह जब यकीन हो गया कि पूरा परिवार मर चुका है तो लाशों को बोरों, चादर में बांधकर पलंग के अंदर छिपाया।
इसके बाद दरवाजा बंद किया, मेन गेट पर ताला डाला। खून से सने कपड़ों को पोटली में बांधकर उसे कांधे पर रखा और पैदल ही वहां से निकल गए।
सलमान ने पुलिस पूछताछ में बताया कि वो 5 लाशों को कहां ठिकाने लगाते। कोई देख लेता तो पकड़े जाते। इसलिए उन्होंने सही तरीका यही निकाला कि लाशों को घर के अंदर ही छिपाकर छोड़ दें। ताकि यहीं लाशें सड़ जाएंगी और चंद रोज बाद पूरा मामला दब जाएगा। फिर कुछ महीने बाद नईम मेरठ आकर मोइन का मकान, प्लॉट अपने नाम कर लेगा। मोइन के परिवार को मारने के लिए पिछले एक महीने से नईम, सलमान मुबई से मेरठ मेरठ में थे। एक महीने में नईम ने मोइन के परिवार से करीबी बढ़ाई उसके घर आने-जाने लगा। ताकि करीबी का फायदा उठाकर कत्ल कर सके। इसी पैटर्न पर उसने हत्याकांड को अंजाम दिया।
8 जनवरी को मोइन और परिवार की हत्या के बाद नईम, सलमान दोनों पैदल ही लिसाड़ी गेट में अपने सौतेले भाई तसलीम के घर गए। उसके घर रातभर रुके। वहां चाय भी पी थी। किसी को शक न हो इसलिए मोइन का मोबाइल भी अपने साथ ले आए थे। लेकिन 9 जनवरी की शाम हत्याकांड सामने आया और पुलिस जांच में जुट गई। पुलिस ने मोइन के सभी भाइयों, रिश्तेदारों, पड़ोसियों को शक के दायरे में लिया। सबसे पूछताछ शुरू कर दी। यहां तक कि एक भाई को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने पूरे परिवार के मोबाइल, कॉल हिस्ट्री को भी चैक किया। तब नईम को लगा कि वो भी पकड़े जाएंगे। जब पुलिस ने नईम, सलमान को घटनास्थल पर आने और पूछताछ के लिए कहा तो दोनों घबरा गए। इसके बाद नईम, सलमान पुलिस के पास नहीं आए बल्कि अपने फोन बंद किए और मेरठ छोड़कर फरार हो गए।
नईम बेटे सलमान को लेकर मेरठ से सबसे पहले 9 जनवरी को रातोंरात दिल्ली पहुंच गया। दोनों दिल्ली में थे। लेकिन उन्हें तसलीम और नजराना के जरिए पता चला कि पुलिस सबको तलाश रही है। मोबाइल ट्रेस हो रहे हैं तो दोनों ने 10 जनवरी को ही दिल्ली छोड़ा और अजमेर चले गए। राजस्थान में छिपते रहे। इसके बाद दोनों महाराष्ट्र में पुलिस से छिपते रहे। इस दौरान छोटे भाई की पत्नी नजराना और तसलीम ने नईम को कॉल कर पुलिस इंवेस्टिगेशन की जानकारी दी थी। पुलिस टीमें लगातार रुढ़की, अजमेर, दिल्ली, मालेगांव, नासिक, मुंब्रा में दोनों की तलाश में जुटी थी। लेकिन सफलता नहीं मिल रही थी।
वही तांत्रिक नईम बाबा पहले से हुलिया और नाम बदलकर छिपने में माहिर है। नईम का असली नाम जमील उर्फ नईम है। लेकिन वो खुद को तांत्रिक बाबा नईम कहलाता है। सामूहिक हत्याकांड के बाद भी उसने हाइड एंड सीक का यही पैंतरा अपनाया। अजमेर में फरारी के दौरान नईम ने अपना हुलिया बदला। उसने अपनी गले तक लंबी दाढ़ी कटवाई, क्लीन शेव हुआ। हमेशा कुर्ता और घुटने तक ऊंचा पजामा पहनने वाला नईम चैक की शर्ट और पेंट पहनकर मॉडर्न लुक में रहने लगा। इसी वजह से पुलिस उस तक पहुंचने में परेशान होती रही।
मीडिया से बात करते हुए एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने बताया कि नईम, सलमान दोनों शुक्रवार रात महाराष्ट्र से मेरठ आए थे। पुलिस टीमें लगातार इस केस में जीजान से जुटी थी। हमें बस क्लू का इंतजार था। मुखबिर से सूचना मिली कि नईम मेरठ आने वाला है। यहां लिसाड़ी गेट में प्लॉट देखने आ रहा है। सूचना पर तुरंत पुलिस टीमें रातोंरात अलर्ट हुई। शनिवार अलसुबह जब नईम अपने बेटे सलमान के साथ लिसाड़ी गेट पहुंचा तो पहले से तैयार पुलिस टीमों ने उनकी घेराबंदी कर ली। दोनों भागने लगे। भागने के दौरान नईम ने पुलिस पर फायर कर दिया। फायरिंग में गोली पुलिस ऑफिसर को छूकर निकली। पुलिस की तरफ से आत्मरक्षार्थ फायर किया गया और गोली नईम को लग गई। घायल को जिला अस्पताल मे उपचार के लिए ले गए जहां उसकी मृत्यु हो गई। लेकिन इसका फायदा उठाकर आरोपी सलमान मौके से फरार हो गया। दिनभर पुलिस सलमान की तलाश में कांबिंग करती रही। देर शाम सलमान के नरहेड़ा गांव लोहिया नगर थाना क्षेत्र में ट्यूबवेल के पास खेत में छिपे होने की सूचना मिली। सूचना पर पुलिस टीम पहुंची। मुठभेड़ में सलमान के पैर में गोली लगी पुलिस ने उसे अरेस्ट कर लिया और जिला अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया है।
इस पूरे केस में मोइन के भाई अमजद की पत्नी नजराना की भूमिका क्या है पुलिस इसकी जांच कर रही है। क्योंकि नजराना पहले दिन से पुलिस हिरासत में है। लगातार पूछताछ जारी है। नजराना पर मुकदमा भी दर्ज है। पुलिस के अनुसार नजराना की भूमिका क्या थी इसकी जांच कर आगे एक्शन लिया जाएगा। बताया जा रहा है कि नजराना ने आरोपी नईम, सलमान को बचाया। उसने ही 9 जनवरी को नईम को फोन कर पुलिस की जांच की जानकारी दी थी। नजराना की कॉलडिटेल से ही पुलिस को नईम, सलमान पर शक हुआ था। इसके बाद ही पुलिस ने नईम, सलमान पर पूरा फोकस किया।
हत्याकांड में पड़ोसी, रिश्तेदारों से लेकर हर आदमी पहले दिन से शक के घेरे में था। लेकिन जिस तरह नईम, सलमान पुलिस पूछताछ में सामने नहीं आए। भाई के घर पर इतना बड़ा हत्याकांड होने के बाद जब पूरा खादांन दुख जताने आया लेकिन नईम, सलमान गायब रहे। फिर उनके फोन बंद हुए और फरार हो गए तब पुलिस का शक दोनों बाप, बेटे पर गहराया। पुलिस परिवार के हर आदमी का क्रिमिनल रिकार्ड भी चैक कर रही थी। जिसमे नईम पर पहले से हत्या के 3 मुकदमे दर्ज थे जिसमें वो वांछित था। सलमान भी 1 मुकदमे में वांछित था। तब पुलिस को दोनो पर और शक हो गया। इलाके के आसपास के सीसीटीवी में जब पुलिस ने नईम, सलमान को पैदल जाते देखा तो यकीन हो गया कि हत्या में इनका हाथ है। इसके बाद पुलिस इसी दिशा में वर्किंग पर लग गई।
5 हत्याओं के मुख्य आरोपी कौन कौन?
(1) सौतेला भाई नईम शनिवार सुबह लिसाड़ी गेट मदीना कालोनी में पुलिस मुठभेड़ में ढेर हो गया। नईम को सीने में 3 गोली लगी उसकी मृत्यु हो गई। नईम पर हत्याकांड में हत्या का मुकदमा भी दर्ज था।
(2) नईम का दत्तक बेटा सलमान। मुकदमे में सलमान का नाम बढ़ाया जाएगा। सलमान ने पिता संग मिलकर पूरी वारदात की है। सलमान शनिवार को दोपहर 3 बजे लोहिया नगर थाना क्षेत्र में पुलिस मुठभेड़ में अरेस्ट हुआ। उसके पैर में गोली लगी है। फिलहाल जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है।
(3) नईम का सगा भाग तसलीम। तसलीम का नाम पहले से हत्याकांड के मुकदमे में दर्ज है। तसलीम को पुलिस 9 जनवरी से हिरासत मे लिए हुए है। उससे पूछताछ हो रही है। तसलीम ने नईम, सलमान की हर तरह से मदद की उन्हें छिपाने, फरारी से लेकर पुलिस को गुमराह करने में शामिल रहा। फिलहाल पुलिस के पास है।
(4) मृतक मोइन की भाभी नजराना। नजराना भी हत्या के मुकदमे में नामजद आरोपी है। नजराना की एक्चुअल भूमिका क्या थी पुलिस जांच रही है। नजराना की भूमिका सामने आने पर पुलिस आगे कार्यवाही करेगी। उसे क्लीनचिट मिलेगी या नहीं यह तय किया जाएगा। फिलहाल पुलिस हिरासत में है।
पुलिस की 8 टीमों ने मिलकर सुलझाया केस
एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने बताया कि पूरे हत्याकांड को सुलझाने में पुलिस की 8 टीमें लगी थीं। 5 टीमें मेरठ से बाहर वर्क कर रही थीं। जिन्हें उत्तराखंड, दिल्ली, राजस्थान और महाराष्ट्र भेजा गया। जहां दोनों आरोपियो की लोकेशन मिल रही थी। 3 टीमें मेरठ में वर्क कर रही थीं। स्वाट, सर्विलांस टीम भी लगी थी। इलेक्ट्रानिक सर्विलांस, सीसीटीवी कैमरों और मुखबिर की मदद से पूरा केस सॉल्व हुआ। शनिवार सुबह नईम से हुई मुठभेड़ में लिसाड़ी गेट थानाप्रभारी को भी गोली टच करके निकले, टीम के कुछ मेंबर्स घायल हैं जो खतरे से बाहर हैं। नईम, सलमान दोनों पर 50-50हजार रुपयों का इनाम था। ये केस पुलिस के लिए बेहद चैलेंजिंग था जिसे पूरी पुलिस टीम, एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह, सीओ कोतवाली आशुतोष और थाना टीम की हेल्प से सॉल्व किया गया। बाकी आरोपी सलमान से पूछताछ जारी है। मुकदमे में उसका नाम बढ़ाया जाएगा।