देवभूमि उत्तराखंड में इन दिनों न्याय के मंदिर दहशत के साये में हैं। पिछले चार दिनों से लगातार मिल रही 'बम की धमकियों' ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। नैनीताल हाईकोर्ट से लेकर अल्मोड़ा और देहरादून तक, एक के बाद एक अदालतों को उड़ाने के ई-मेल आ रहे हैं। क्या यह किसी की शरारत है या किसी गहरी साजिश का हिस्सा? आखिर क्यों इन धमकियों में 'C-4' विस्फोटक और 'ISI' जैसे खतरनाक नाम लिए जा रहे हैं?
उत्तराखंड की अदालतों में इन दिनों फाइलों से ज्यादा मेटल डिटेक्टर की गूंज सुनाई दे रही है। गुरुवार को लगातार चौथे दिन प्रदेश की 6 अदालतों को बम से उड़ाने की धमकी मिली। इस बार निशाना बना सरोवर नगरी नैनीताल स्थित उच्च न्यायालय। चीफ जस्टिस और रजिस्ट्रार कार्यालय को मिले एक ई-मेल ने पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा दिया। आनन-फानन में आईजी कुमाऊं रिद्धिम अग्रवाल खुद मोर्चे पर उतरीं और पूरे परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया।
यह धमकी महज एक अफवाह नहीं लगती, क्योंकि इसमें इस्तेमाल की गई भाषा बेहद तकनीकी और डरावनी है। ई-मेल में दावा किया गया है कि परिसरों में 'C-4' जैसे सैन्य-ग्रेड विस्फोटक लगाए गए हैं। इतना ही नहीं, इस ई-मेल के तार पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI, तमिलनाडु के आरक्षण मुद्दे और प्रतिबंधित संगठन LTTE से जोड़े गए हैं। जांच में पता चला है कि यह ई-मेल माइक्रोसॉफ्ट आउटलुक पर तैयार कर भारत और पाकिस्तान समेत करीब 130 जगहों पर फॉरवर्ड किया गया था।
अदालतों को मिल रही इन धमकियों का सबसे ज्यादा असर वकीलों और वादकारियों पर पड़ रहा है। हल्द्वानी से लेकर नैनीताल तक के वकील डरे हुए हैं और उन्होंने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने तक कोर्ट बंद करने की मांग उठाई है। एसएसपी नैनीताल मंजूनाथ टीसी ने कोर्ट स्टाफ और वकीलों के लिए 'एंट्री कार्ड सिस्टम' अनिवार्य कर दिया है। अब बिना पहचान पत्र के परिंदा भी कोर्ट के भीतर प्रवेश नहीं कर पाएगा।
सुरक्षा एजेंसियां इसे एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय साजिश मानकर चल रही हैं। साइबर सेल, एटीएस और लोकल इंटेलिजेंस पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं। क्या यह किसी अपराधी की अदालत को डराने की कोशिश है या फिर देवभूमि की शांति को भंग करने का कोई बड़ा प्लान? फिलहाल सुरक्षा चाक-चौबंद है, लेकिन इन धमकियों ने न्यायिक व्यवस्था के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।