गोरखपुर में उस वक्त एक बड़ा हादसा हो गया जब एक मासूम साइकिल चलाना सीख रहा था तभी वह निर्मला अधीन नाले में जा गिरा। नाले में गिरने से सरिया उसके पेट में खुस गया और तड़प तड़प कर उसकी मौत हो गई। बता दें चलवा थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर 5 डा विस्तार नगर कॉलोनी के पास मुंडेरा निवासी श्याम सुंदर का 12 वर्षी पुत्र कन्हैया चौरसिया नाला क्रॉस कर रहा था कि अचानक उसकी साइकिल खुले नाले में जा गिरा बालक भी उसे नाले में गिर पड़ा। नाले के अंदर निकला सरिया उसके पेट में खुस गया जिससे मासूम की मौत हो गई।
खुले नाले में गिरने से 12 वर्षीय कन्हैया चौरसिया की मौत ने न केवल उसके परिवार बल्कि शहर को झकझोर दिया है। मासूम की असमय मौत ने विकास कार्यों की निगरानी और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नाला ढृका होता तो शायद कन्हैया आज जिंदा होता।
यह नाला और ट्रेंच निर्माण का कार्य जून 2025 में पूरा हो चुका था। इसके बावजूद कई स्थानों पर ट्रेंच को खुला छोड़ दिया गया। जहां घटना हुई वहां कई छड़ निकले हुए हैं। नीचे की ओर ढलाई भी नहीं हुई है। प्राधिकरण के मुताबिक यह कार्य प्रभा कंस्ट्रक्शन फर्म द्वारा कराया गया था। सवाल यह है कि काम पूरा होने के बाद भी सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं किए गए और निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी? फिलहाल घटना के बाद प्राधिकरण के उपाध्यक्ष आनंद वर्द्धन ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। उनका कहना है कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और जवाबदेही तय की जाएगी।
उपाध्यक्ष आनंद वर्द्धन के निर्देश पर प्रभारी मुख्य अभियंता किशन सिंह के नेतृत्व में अभियंताओं की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और पीड़ित परिवार से मुलाकात की। बाद में उपाध्यक्ष स्वयं भी परिवार से मिले और मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से आर्थिक सहायता दिलाने का आश्वासन दिया।हालांकि यह पहली घटना नहीं है। पिछले वर्षा ऋतु में घोषीपुरवा क्षेत्र में नगर निगम के निर्माणाधीन खुले नाले में गिरने से एक आठ वर्षीय बच्ची की डूबकर मौत हो गई थी। उस समय भी जांच और कार्रवाई के आश्वासन दिए गए थे। हुआ कुछ नहीं।