इतिहास के पन्नों में जौहर की कई गाथाएं भरी पड़ी हैं। इनमें से ही एक जौहर आज से लगभग 720 साल पहले हुआ था। बहुत समय पहले की बात है जब सिंघल द्वीप के राजा गंधर्वसेन और रानी चंपावती के महल में एक पुत्री का जन्म हुआ। उस पुत्री का नाम पद्मावती रखा गया। वह 13वीं और 14वीं सदी की महान भारतीय रानी बनी। उस समय रानी पद्मावती की सुंदरता के चर्चे दूर-दूर तक फैले हुए थे। रानी पद्मावती के साहस और बलीदान की गाथा इतिहास में अमर है।
रानी पद्मावती का विवाह चित्तौड़ के महाराजा रतन सिंह के साथ हुआ था। यह विवाह साहस और प्रेम का प्रतीक बन गया। रानी पद्मावती अत्यंत सुंदर थीं, और उनकी सुंदरता पर एक दिन दिल्ली के सुलतान अलाउद्दीन खिलजी की बुरी नजर पड़ी। अलाउद्दीन खिलजी चित्तौड़ पर आक्रमण करने की योजना बनाने लगा। वह न केवल चित्तौड़ पर विजय प्राप्त करना चाहता था, बल्कि रानी पद्मावती को अपने साथ लेकर जाना चाहता था।
अलाउद्दीन ने राजा रतन सिंह को संदेश भेजा कि वह रानी पद्मावती से मिलना चाहता है। उसने यह भी कहा कि वह रानी को अपनी बहन समान मानता है और एक बार उनसे मिलकर लौट जाएगा। राजपूत धर्म की मर्यादा का पालन करते हुए राजा रतन सिंह ने रानी पद्मावती से इस विषय पर बात की। रानी ने शर्त रखी कि वह पर्दे के पीछे से ही अपनी झलक दिखाएंगी। इसके लिए एक विशाल दर्पण मंगवाया गया, जिसमें रानी की छवि दिखाई गई।
अलाउद्दीन ने रानी की बस झलक देखी और उसकी लालसा रानी को पाने के लिए और बढ़ गई। इसके बाद उसने चित्तौड़ पर आक्रमण कर दिया और किले की घेराबंदी कर दी। उसने आने-जाने के सभी रास्ते बंद कर दिए। अलाउद्दीन के पास विशाल सेना थी, और वह लगातार छह महीने तक किले के बाहर डेरा डाले रहा। इस दौरान किले के अंदर खाद्य और आवश्यक वस्तुओं की भारी कमी होने लगी।
स्थिति गंभीर होने पर राजा रतन सिंह ने युद्ध की घोषणा कर दी। उन्होंने बहादुरी से खिलजी की सेना का सामना किया, लेकिन वह युद्ध जीत नहीं सके। राजा रतन सिंह के युद्ध में वीरगति को प्राप्त करने के बाद रानी पद्मावती ने जौहर करने का निर्णय लिया। जौहर एक प्राचीन राजपूत परंपरा मानी जाती थी, जिसमें महिलाएं अपनी इज्जत की रक्षा के लिए आत्मदाह करती थीं। यह एक साहसिक और सामाजिक मर्यादा का प्रतीक माना जाता था। चित्तौड़गढ़ किले में स्थित जौहर स्थल वह स्थान है, जहां रानी पद्मावती और अनेक राजपूत महिलाओं ने जौहर किया था। यह स्थान आज भी उनके बलिदान और वीरता की गवाही देता है। हर साल यहां जौहर मेला आयोजित होता है, जिसमें लोग रानी पद्मावती की वीरता को सम्मानित करते हैं और उनकी गाथाओं को जीवित रखते हैं।